दोस्तों, आज हम बात करेंगे nse india option chain के बारे में, जो स्टॉक मार्केट में ऑप्शन ट्रेडिंग करने वालों के लिए एक सुपर उपयोगी टूल है। अगर आप नए हैं या पहले से ट्रेड करते हैं लेकिन nse option chain को पूरी तरह समझ नहीं पाए, तो फिक्र मत करो। हम यहां सब कुछ आसान भाषा में बताएंगे, जैसे दोस्तों के साथ बैठकर चाय पर डिस्कस कर रहे हों। nse option chain क्या है, इसे कैसे ऐक्सेस करें, और इससे ट्रेडिंग में कैसे फायदा उठाएं – सब कवर करेंगे। चलिए, शुरू करते हैं!
शेयर बाज़ार में “क्या करना है” से ज़्यादा ज़रूरी यह जानना है कि “क्या नहीं करना है”। NSE India Option Chain का डेटा जितना पावरफुल है, इसे गलत तरीके से पढ़ने पर उतना ही नुकसान भी हो सकता है।
नोट: यह पोस्ट केवल शैक्षणिक और जानकारी के उद्देश्य से है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
इसे मैंने पूरी रिसर्च करके लिखा है और रिसर्च करने में बहुत मेहनत लगती है कृपया इसे आगे दूसरे लोगों को भी शेयर करें ताकि वह भी सीखे
What is nse india option chain?
सबसे पहले जानते हैं कि nse india option chain आखिर है क्या। nse india option chain नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर उपलब्ध एक लिस्ट है, जहां सभी ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स की जानकारी मिलती है। इसमें कॉल ऑप्शन और पुट ऑप्शन दोनों होते हैं। सिंपल बोलें तो, nse india option chain वो जगह है जहां आप देख सकते हैं कि किस इंडेक्स या स्टॉक के लिए कितने स्ट्राइक प्राइस पर ऑप्शन हैं, और मार्केट का सेंटिमेंट क्या चल रहा है।
दोस्तों, nse india option chain से आप मार्केट की दिशा का अनुमान लगा सकते हैं। मिसाल के तौर पर, अगर आप निफ्टी पर ट्रेडिंग कर रहे हैं, तो nse india option chain बताती है कि लोग ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं या बिकवाली। ये BSE की ऑप्शन चेन से मिलती-जुलती है, लेकिन NSE ज्यादा पॉपुलर है। nse india option chain में ओपन इंटरेस्ट, वॉल्यूम, और प्राइस चेंज जैसी डिटेल्स देखकर आप स्मार्ट फैसले ले सकते हैं।
How to Access NSE Option Chain Easily
अब आते हैं असली बात पर – nse india option chain को कैसे देखें? दोस्तों, ये बहुत आसान है। NSE की ऑफिशियल वेबसाइट www.nseindia.com पर जाएं। वहां मार्केट्स सेक्शन में ऑप्शन चेन पर क्लिक करें। अगर डायरेक्ट लिंक चाहिए, तो “nse option chain” सर्च करें।
स्टेप बाय स्टेप: साइट ओपन करें, अंडरलाइंग इंडेक्स या स्टॉक चुनें जैसे निफ्टी। एक्सपायरी डेट सिलेक्ट करें, और हो गया – nse india option chain स्क्रीन पर। मोबाइल पर ऐप्स जैसे Sensibull या TradingView से भी nse option chain चेक कर सकते हैं। याद रखो, nse india option chain रियल-टाइम डेटा देती है, तो ट्रेडिंग ऑवर्स में देखो।
BSE Option Chain को ‘Pro’ की तरह कैसे पढ़ें?
ये देखो, nse india option chain का एक सिंपल उदाहरण इमेज, जहां कॉल और पुट साइड क्लियर दिख रही है।
Key Components of NSE Option Chain Explained Simply
दोस्तों, nse india option chain में कई कॉलम्स हैं, लेकिन डरो मत। हम एक-एक करके समझेंगे। सबसे महत्वपूर्ण है स्ट्राइक प्राइस – वो प्राइस जहां ऑप्शन एक्सरसाइज होता है। फिर OI यानी ओपन इंटरेस्ट, जो बताता है कितने कॉन्ट्रैक्ट्स खुले हैं। ज्यादा OI मतलब ज्यादा ध्यान।
फिर वॉल्यूम – आज कितने ट्रेड हुए। LTP यानी लास्ट ट्रेडेड प्राइस, और चेंज जो प्राइस की ऊपर-नीचे दिखाता है। IV यानी इम्प्लाइड वोलैटिलिटी, जो मार्केट की घबराहट बताती है। nse india option chain में ये सब देखकर पता चलता है कि बुलिश है या बेयरिश। जैसे, कॉल साइड पर OI बढ़ा तो मार्केट ऊपर जा सकता है।
NSE India Option Chain में स्ट्राइक प्राइस: एक विस्तृत गाइड
अगर आप ऑप्शन ट्रेडिंग की दुनिया में कदम रख रहे हैं, तो NSE India Option Chain को समझना आपके लिए सबसे ज़रूरी है। ऑप्शन चेन का सबसे मुख्य हिस्सा स्ट्राइक प्राइस (Strike Price) होता है, जो पूरी ट्रेडिंग रणनीति का आधार बनता है।
स्ट्राइक प्राइस क्या है? (What is Strike Price?)
सरल शब्दों में कहें तो, स्ट्राइक प्राइस वह पूर्व-निर्धारित कीमत है जिस पर एक ट्रेडर किसी इंडेक्स (जैसे निफ्टी) या स्टॉक को खरीदने या बेचने का कॉन्ट्रैक्ट करता है। जब आप NSE की वेबसाइट पर ऑप्शन चेन देखते हैं, तो स्ट्राइक प्राइस हमेशा बीच के कॉलम में दिखाई देता है।
- बाईं तरफ (Left Side): यहाँ ‘कॉल ऑप्शन’ (Call Options) का डेटा होता है।
- दाईं तरफ (Right Side): यहाँ ‘पुट ऑप्शन’ (Put Options) का डेटा होता है।
ATM, ITM और OTM को समझना
NSE India Option Chain में इन तीन शब्दों का बहुत महत्व है। इसे समझने के लिए मान लेते हैं कि निफ्टी (Nifty) अभी 25,000 पर ट्रेड कर रहा है।
1. ATM (At The Money)
जब स्ट्राइक प्राइस बाजार की मौजूदा कीमत (Spot Price) के बिल्कुल करीब होता है, तो उसे ATM कहते हैं।
- उदाहरण: अगर निफ्टी 25,000 पर है, तो 25,000 का स्ट्राइक प्राइस ATM कहलाएगा।
2. ITM (In The Money)
यह वह स्ट्राइक प्राइस है जिसे बाजार पहले ही पार कर चुका है। इसमें ‘इंट्रिन्सिक वैल्यू’ (Intrinsic Value) होती है।
- कॉल ऑप्शन के लिए: वर्तमान कीमत से नीचे वाले सभी स्ट्राइक (जैसे 24,900, 24,800) ITM हैं।
- पुट ऑप्शन के लिए: वर्तमान कीमत से ऊपर वाले सभी स्ट्राइक (जैसे 25,100, 25,200) ITM हैं।
3. OTM (Out Of The Money)
यह वह स्ट्राइक प्राइस है जहाँ तक बाजार अभी पहुँचा नहीं है। इनकी कीमत कम होती है क्योंकि इनमें सिर्फ ‘टाइम वैल्यू’ होती है।
- कॉल ऑप्शन के लिए: वर्तमान कीमत से ऊपर वाले स्ट्राइक (जैसे 25,100) OTM हैं।
- पुट ऑप्शन के लिए: वर्तमान कीमत से नीचे वाले स्ट्राइक (जैसे 24,900) OTM हैं।
एक नज़र में तुलना (Quick Table)
NSE India Option Chain का विश्लेषण करते समय स्ट्राइक प्राइस का चुनाव आपकी रिस्क क्षमता पर निर्भर करता है। ITM ऑप्शंस महंगे होते हैं लेकिन सुरक्षित माने जाते हैं, वहीं OTM ऑप्शंस सस्ते होते हैं लेकिन उनमें जोखिम अधिक होता है।
NSE India Option Chain को समझने की पूरी गाइड: OI, वॉल्यूम और PCR का खेल
ऑप्शन ट्रेडिंग में सफल होने के लिए सिर्फ चार्ट देखना काफी नहीं है। आपको NSE India Option Chain के पीछे छिपे डेटा को पढ़ना आना चाहिए। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि ओपन इंटरेस्ट (OI), वॉल्यूम और PCR रेशियो कैसे काम करते हैं।
1. ओपन इंटरेस्ट (Open Interest – OI): बाज़ार का असली ‘किंग’
अगर आप ऑप्शन चेन के डेटा को एक युद्ध की तरह देखें, तो ओपन इंटरेस्ट (OI) आपको यह बताता है कि मैदान में कितने सैनिक (कॉन्ट्रैक्ट्स) डटे हुए हैं। OI उन कॉन्ट्रैक्ट्स की कुल संख्या है जो अभी तक बंद (Settle) नहीं हुए हैं।
OI को कैसे पढ़ें?
ऑप्शन चेन में OI का विश्लेषण हमेशा ‘ऑप्शन राइटर’ (सेलर) के नजरिए से किया जाता है, क्योंकि वे बड़े पैसे के साथ बाज़ार में उतरते हैं।
- बुलिश संकेत (Strong Hands): यदि बाज़ार ऊपर जा रहा है और साथ में OI भी बढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि नई खरीदारी (Long Build-up) हो रही है। यह बाज़ार की मज़बूती का संकेत है।
- बेयरिश संकेत: यदि बाज़ार नीचे गिर रहा है और OI बढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि शॉर्ट सेलिंग (Short Build-up) हो रही है।
- OI चेंज (Change in OI): यह कॉलम सबसे महत्वपूर्ण है। यह आपको बताता है कि आज के दिन ट्रेडर्स किस स्ट्राइक प्राइस पर सबसे ज़्यादा भरोसा दिखा रहे हैं या कहाँ से डरकर भाग रहे हैं।
2. वॉल्यूम (Volume): बाज़ार की धड़कन
वॉल्यूम हमें यह बताता है कि किसी खास स्ट्राइक प्राइस पर कितनी बार हाथ बदले गए (लेन-देन हुआ)।
- लिक्विडिटी की पहचान: जिस स्ट्राइक प्राइस पर वॉल्यूम ज़्यादा होता है, वहाँ एंट्री और एग्जिट करना आसान होता है।
- OI बनाम वॉल्यूम: याद रखें, वॉल्यूम सिर्फ उस दिन के ट्रेड बताता है, जबकि OI उस स्ट्राइक पर बने हुए कुल पेंडिंग कॉन्ट्रैक्ट्स को दिखाता है। यदि वॉल्यूम बहुत ज़्यादा है लेकिन OI नहीं बढ़ रहा, तो इसका मतलब है कि लोग सिर्फ इंट्राडे ट्रेडिंग करके बाहर निकल रहे हैं।
3. PCR Ratio: सेंटीमेंट पकड़ने का अचूक तरीका
PCR (Put-Call Ratio) आपको यह बताता है कि बाज़ार में डर का माहौल है या लालच का। यह डेटा आपको NSE India Option Chain के सबसे नीचे ‘Grand Total’ वाले हिस्से से मिलता है।
गणना (The Calculation):
जैसा कि हमने पहले चर्चा की, इसका फॉर्मूला है:
डीप एनालिसिस (Deep Interpretation):
- High PCR (1.2 से 1.5+): इसका मतलब है कि पुट राइटर्स (Bulls) का दबदबा है। लेकिन ध्यान रहे, यदि PCR बहुत ज़्यादा (1.8+) हो जाए, तो बाज़ार ‘Overbought’ हो सकता है और वहाँ से गिरावट आ सकती है।
- Low PCR (0.5 से 0.7): यह दिखाता है कि कॉल राइटर्स (Bears) हावी हैं। यदि PCR बहुत कम (0.4 के आसपास) चला जाए, तो बाज़ार ‘Oversold’ माना जाता है और यहाँ से बाउंस बैक (रिकवरी) की उम्मीद होती है।
4. स्ट्राइक प्राइस और मनीनेस (Quick Revision)
ऑप्शन चेन के केंद्र में स्ट्राइक प्राइस होता है। अपनी ट्रेडिंग के लिए सही स्ट्राइक चुनना एक कला है:
- ITM (In The Money): सुरक्षित ट्रेडर्स के लिए, क्योंकि इसमें रिस्क कम और डेल्टा ज़्यादा होता है।
- ATM (At The Money): सबसे ज़्यादा एक्टिविटी यहाँ होती है।
- OTM (Out Of The Money): सस्ते ऑप्शंस, लेकिन इनके ज़ीरो होने की संभावना सबसे ज़्यादा होती है।
NSE India Option Chain सिर्फ नंबरों का खेल नहीं है, बल्कि यह बड़े ट्रेडर्स की साइकोलॉजी है। अगर आप OI चेंज, वॉल्यूम और PCR को मिलाकर देखना सीख गए, तो आपकी ट्रेडिंग की सटीकता (Accuracy) काफी बढ़ जाएगी।
प्रो की तरह NSE Option Chain कैसे पढ़ें? (Step-by-Step Guide)
सिर्फ डेटा देखना काफी नहीं है, उसे डिकोड करना असली कला है। यहाँ बताया गया है कि एक प्रोफेशनल ट्रेडर NSE India Option Chain का विश्लेषण कैसे करता है:
चरण 1: सही एक्सपायरी (Expiry) का चयन
NSE की वेबसाइट पर सबसे पहले अपनी एक्सपायरी डेट चुनें।
- इंट्राडे ट्रेडर्स: आमतौर पर साप्ताहिक (Weekly) एक्सपायरी चुनते हैं क्योंकि इसमें मूवमेंट तेज़ होती है।
- पोजीशनल ट्रेडर्स: मासिक (Monthly) एक्सपायरी को प्राथमिकता देते हैं।
चरण 2: सपोर्ट और रेजिस्टेंस की पहचान (The OI Game)
ऑप्शन चेन में जिस स्ट्राइक प्राइस पर सबसे ज़्यादा ओपन इंटरेस्ट (Highest OI) होता है, वह बाज़ार के लिए ‘दीवार’ का काम करता है।
- मजबूत सपोर्ट (Support): सबसे ज़्यादा पुट (Put) OI वाली स्ट्राइक प्राइस को देखें। अगर निफ्टी गिर रहा है, तो यह लेवल उसे नीचे जाने से रोकेगा।
- लॉजिक: पुट राइटर्स (Bulls) इस लेवल पर बाज़ार को बचा रहे हैं।
- मजबूत रेजिस्टेंस (Resistance): सबसे ज़्यादा कॉल (Call) OI वाली स्ट्राइक प्राइस को देखें। यह बाज़ार को ऊपर जाने से रोकेगा।
- लॉजिक: कॉल राइटर्स (Bears) इस लेवल के ऊपर बाज़ार को जाने नहीं देना चाहते।
चरण 3: ITM और OTM का रंग पहचानें
NSE की अधिकारिक वेबसाइट पर, आपको कुछ हिस्से गहरे रंग (Shaded/Highlight) में और कुछ सफेद बैकग्राउंड में दिखेंगे:
- Highlighted/Shaded Area: यह ITM (In The Money) ऑप्शंस होते हैं। इनकी इंट्रिन्सिक वैल्यू ज़्यादा होती है।
- White Area: यह OTM (Out Of The Money) ऑप्शंस होते हैं।
चरण 4: OI चेंज का जादुई कॉम्बिनेशन
ट्रेड लेने से पहले इस फॉर्मूले को याद रखें:
- कॉल OI बढ़ रहा है + पुट OI घट रहा है: यह कमजोरी का संकेत है। बाज़ार नीचे जा सकता है।
- पुट OI बढ़ रहा है + कॉल OI घट रहा है: यह मज़बूती का संकेत है। यहाँ से खरीदारी (Buy) का मौका बन सकता है।
पेपर ट्रेडिंग: सफलता की पहली सीढ़ी
किसी भी रणनीति को असली पैसे से आज़माने से पहले NSE India Option Chain के डेटा को लाइव मार्केट में देखें और पेपर ट्रेडिंग (Paper Trading) करें। इससे आपको बिना रिस्क के डेटा की चाल समझने में मदद मिलेगी।
7 Powerful Strategies for Trading with NSE india Option Chain
NSE India Option Chain का डेटा केवल सूचना नहीं है, बल्कि यह बाज़ार के बड़े खिलाड़ियों (FIIs/DIIs) के कदमों के निशान हैं। इन 7 रणनीतियों से आप उन निशानों को पहचान सकते हैं:
1. OI बिल्डअप का विश्लेषण (OI Build-up Analysis)
केवल OI देखना काफी नहीं है, यह देखना ज़रूरी है कि वह किस दिशा में बढ़ रहा है।
- लॉन्ग बिल्डअप (Long Build-up): जब प्राइस बढ़ रहा हो और साथ में कॉल साइड का OI भी बढ़े। इसका मतलब है कि खरीदार हावी हैं।
- शॉर्ट कवरिंग (Short Covering): जब प्राइस बढ़े लेकिन OI घटे। इसका मतलब है कि जिन्होंने पहले बेचा था, वे अब डरकर अपनी पोजीशन काट रहे हैं। यह एक बहुत तेज़ उछाल का संकेत होता है।
2. एडवांस PCR रणनीति (The 0.7 Rule)
PCR (पुट-कॉल रेशियो) सेंटीमेंट पकड़ने का सबसे तेज़ तरीका है।
- प्रो टिप: अगर NSE Option Chain में PCR 0.7 या उससे नीचे चला जाता है, तो इसका मतलब है कि बाज़ार ‘Oversold’ है। यहाँ से अचानक एक बुलिश (Bullish) रिवर्सल आने की संभावना बहुत ज़्यादा होती है। प्रोफेशनल ट्रेडर्स यहाँ पुट खरीदने के बजाय कॉल खरीदने का मौका ढूंढते हैं।
3. मैक्स पेन थ्योरी (Max Pain Theory)
यह थ्योरी मानती है कि एक्सपायरी के दिन बाज़ार उस स्ट्राइक प्राइस पर बंद होगा जहाँ ऑप्शन सेलर्स (राइटर्स) को सबसे कम नुकसान हो।
- कैसे इस्तेमाल करें: ऑप्शन चेन में वह स्ट्राइक प्राइस ढूंढें जहाँ ‘कॉल’ और ‘पुट’ दोनों का कुल OI सबसे ज़्यादा हो। एक्सपायरी के करीब, प्राइस अक्सर उसी लेवल (मैग्नेट की तरह) की ओर खिंचा चला आता है।
4. इंप्लाइड वोलैटिलिटी (High IV Strategy)
IV (Implied Volatility) हमें बाज़ार में होने वाली घबराहट या उत्साह के बारे में बताती है।
- रणनीति: जब IV बहुत ज़्यादा (High) हो, तो ऑप्शन के प्रीमियम बहुत महंगे होते हैं। ऐसे समय में ऑप्शन खरीदना जोखिम भरा है। प्रो ट्रेडर्स हाई IV पर ऑप्शन सेलिंग (Writing) करते हैं ताकि ‘वोलैटिलिटी क्रश’ का फायदा उठा सकें।
5. स्ट्रैडल वेरिफिकेशन (Straddle Verification)
एक स्ट्रैडल (Straddle) में ट्रेडर एक ही स्ट्राइक की कॉल और पुट दोनों खरीदता या बेचता है।
- चेन का उपयोग: ऑप्शन चेन में ATM स्ट्राइक को देखें। यदि वहाँ कॉल और पुट दोनों तरफ भारी OI है, तो बाज़ार के एक रेंज में रहने की संभावना होती है (Short Straddle)। यदि OI कम है और वॉल्यूम बढ़ रहा है, तो एक बड़ा ब्रेकआउट आने वाला है (Long Straddle)।
6. डायनामिक सपोर्ट और रेजिस्टेंस (S&R)
बाज़ार में सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्थिर नहीं होते, वे हर मिनट बदलते हैं।
- सपोर्ट: वह स्ट्राइक जहाँ सबसे ज़्यादा ‘पुट OI’ जमा हो रहा है।
- रेजिस्टेंस: वह स्ट्राइक जहाँ सबसे ज़्यादा ‘कॉल OI’ जमा हो रहा है।
- ध्यान दें: अगर रेजिस्टेंस वाला OI घटने लगे और ऊपर की स्ट्राइक पर शिफ्ट होने लगे, तो समझ लें कि बाज़ार में बड़ी तेज़ी आने वाली है।
7. डेली OI चेंज को ट्रैक करना (Tracking Daily OI Change)
पुराने OI डेटा से ज़्यादा महत्वपूर्ण आज का ‘बदलाव’ (Change in OI) है।
- रणनीति: हर दिन दोपहर 2 बजे के बाद NSE India Option Chain में ‘OI Change’ देखें। यदि किसी तरफ बहुत तेज़ी से अनवाइंडिंग (Unwinding – पोजीशन कटना) हो रही है, तो अगले दिन बाज़ार में उसी दिशा में एक बड़ा ‘गैप अप’ या ‘गैप डाउन’ देखने को मिल सकता है।
NSE india Option Chain एनालिसिस में होने वाली 5 बड़ी गलतियाँ
1. केवल प्राइस (LTP) देखना और OI को नजरअंदाज करना
ज़्यादातर नए ट्रेडर्स सिर्फ चार्ट पर ‘प्राइस’ बढ़ते हुए देखते हैं और कॉल खरीद लेते हैं।
- गलती: प्राइस तो बढ़ रहा है, लेकिन अगर कॉल साइड पर भारी Open Interest (OI) रेजिस्टेंस के रूप में खड़ा है, तो बाज़ार वहाँ से तुरंत पलट सकता है।
- सही तरीका: ट्रेड लेने से पहले देखें कि क्या प्राइस के साथ OI भी सपोर्ट कर रहा है। बिना OI सपोर्ट के प्राइस का बढ़ना अक्सर एक ‘ट्रैप’ (जाल) होता है।
2. गलत एक्सपायरी का चयन (Selecting the Wrong Expiry)
- गलती: कई ट्रेडर्स कम प्रीमियम के लालच में दूर की एक्सपायरी या एक्सपायरी के बिल्कुल करीब वाले ओटीएम (OTM) ऑप्शंस खरीद लेते हैं।
- नुकसान: एक्सपायरी के दिन ‘थीटा डिके’ (Time Decay) बहुत तेज़ी से होता है। अगर बाज़ार आपकी दिशा में थोड़ा भी धीरे चला, तो भी आपका प्रीमियम ज़ीरो हो सकता है।
- सही तरीका: अपनी रणनीति के हिसाब से एक्सपायरी चुनें। इंट्राडे के लिए करंट वीकली एक्सपायरी ठीक है, लेकिन सुरक्षित ट्रेडिंग के लिए अगली वीकली एक्सपायरी या मंथली एक्सपायरी बेहतर मानी जाती है।
3. PCR को बिना समझे (अंधाधुंध) अप्लाई करना
- गलती: अक्सर लोग सुनते हैं कि PCR 1.5 है तो बाज़ार बहुत बुलिश है और वहाँ कॉल खरीद लेते हैं।
- सच्चाई: जब PCR बहुत ज़्यादा (जैसे 1.7 या 1.8) हो जाता है, तो बाज़ार ‘Overbought’ हो जाता है। इसका मतलब है कि अब खरीदारी बंद होने वाली है और मुनाफावसूली (Profit Booking) आ सकती है।
- सही तरीका: PCR को हमेशा अन्य इंडिकेटर्स के साथ मिलाकर देखें। बहुत हाई या बहुत लो PCR पर रिवर्सल का इंतज़ार करें।
4. वॉल्यूम (Volume) को इग्नोर करना
- गलती: कम वॉल्यूम वाले स्ट्राइक प्राइस पर ट्रेड करना।
- नुकसान: अगर आप ऐसे स्ट्राइक प्राइस (अक्सर गहरे OTM) में घुस जाते हैं जहाँ वॉल्यूम नहीं है, तो आप उसे बेच नहीं पाएंगे। इसे ‘लिक्विडिटी रिस्क’ कहते हैं। यहाँ बिड-आस्क स्प्रेड (खरीद और बेच की कीमत का अंतर) बहुत ज़्यादा होता है, जिससे आप तुरंत घाटे में आ जाते हैं।
- सही तरीका: हमेशा उन्हीं स्ट्राइक्स पर ट्रेड करें जहाँ वॉल्यूम और एक्टिविटी सबसे ज़्यादा हो (आमतौर पर ATM के आसपास)।
5. बिना प्रैक्टिस के लाइव मार्केट में कूदना
- गलती: ऑप्शन चेन के डेटा को एक-दो बार देखकर ही बड़ा कैपिटल लगा देना।
- सही तरीका: ऑप्शन चेन एक गतिशील (Dynamic) टूल है। इसे समझने के लिए कम से कम 2-4 हफ्ते पेपर ट्रेडिंग करें। लाइव मार्केट में डेटा कैसे बदलता है और निफ्टी/बैंकनिफ्टी उस पर कैसे रिएक्ट करते हैं, इसे महसूस करना (Feel the market) ज़रूरी है।
नए ट्रेडर्स के लिए NSE india Option Chain के फायदे (Benefits)
एक शुरुआती ट्रेडर के लिए NSE India Option Chain किसी ‘जीपीएस (GPS)’ से कम नहीं है। इसके मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:
- मार्केट सेंटीमेंट की स्पष्ट तस्वीर: चार्ट पर केवल कैंडलस्टिक दिखती हैं, लेकिन ऑप्शन चेन आपको बताती है कि बाज़ार के पीछे ट्रेडर्स की सोच (Bullish या Bearish) क्या है।
- जोखिम प्रबंधन (Risk Control): ऑप्शन चेन की मदद से आप जान सकते हैं कि बाज़ार कहाँ जाकर रुक सकता है। इससे आप गलत स्ट्राइक प्राइस चुनने से बच जाते हैं और अपने स्टॉप-लॉस (Stop-Loss) को सही जगह लगा पाते हैं।
- स्मार्ट एंट्री और एग्जिट: यह आपको बताती है कि किस लेवल पर बड़े खिलाड़ी (Big Players) सक्रिय हैं। जब आप उनके साथ ट्रेड करते हैं, तो आपके सफल होने की संभावना बढ़ जाती है।
- डाटा-आधारित निर्णय: यह आपको “अंदाजे” (Guesswork) के बजाय ठोस आंकड़ों के आधार पर ट्रेड लेने में मदद करती है।
एडवांस्ड टिप्स: छुपे हुए राज़ खोलें (Unlock Hidden Secrets)
यदि आप ऑप्शन चेन को प्रो लेवल पर इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो इन तीन ‘सीक्रेट्स’ पर ध्यान दें:
1. OI अनवाइंडिंग (OI Unwinding) को पहचानें
जब किसी स्ट्राइक प्राइस पर OI अचानक घटने लगे (Negative Change in OI), तो इसे ‘अनवाइंडिंग’ कहते हैं।
- सीक्रेट: अगर बाज़ार ऊपर जा रहा है और कॉल साइड पर भारी अनवाइंडिंग हो रही है, तो समझ लें कि कॉल राइटर्स डर रहे हैं। यह एक ‘शॉर्ट कवरिंग रैली’ का संकेत है, जहाँ बाज़ार बहुत तेज़ी से ऊपर भाग सकता है।
2. कॉन्फ्लुएंस (Confluence) का उपयोग करें
सिर्फ ऑप्शन चेन पर निर्भर न रहें। इसे तकनीकी इंडिकेटर्स जैसे RSI (Relative Strength Index) या VWAP के साथ मिलाएं।
- प्रो टिप: अगर RSI ‘ओवरसोल्ड’ दिखा रहा है और साथ ही ऑप्शन चेन में भारी ‘पुट राइटिंग’ (सपोर्ट) दिख रही है, तो यह ट्रेड लेने का सबसे मजबूत सिग्नल है।
3. 15-मिनट OI ट्रैकिंग (Intraday Special)
इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए पूरे दिन का डेटा देखना काफी नहीं है।
- एडवांस्ड ट्रिक: हर 15 मिनट में NSE India Option Chain का स्नैपशॉट लें और देखें कि पिछले 15 मिनट में किस तरफ सबसे ज़्यादा कॉन्ट्रैक्ट्स जुड़े हैं। यह आपको बाज़ार के ‘इमीडिएट’ (तत्काल) ट्रेंड की जानकारी देगा। NSE india Option Chain