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future and options trading
/ Share Market / By Raffi

 

Table of Contents

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    • future and options trading
  • ऑप्शन प्राइसिंग मॉडल: प्रीमियम कैसे तय होता है?
      • वोलेटिलिटी या अस्थिरता (Implied Volatility – IV)
      • स्पॉट प्राइस (Spot Price)
      • स्ट्राइक प्राइस (Strike Price)
      • टाइम टू एक्सपायरी (Time to Expiry)
      • इंटरेस्ट रेट (Interest Rate)
      • डिविडेंड (Dividend)
      • निष्कर्ष और 2026 के लिए सुझाव
  • बेसिक ऑप्शन स्ट्रैटेजीज: शुरुआती ट्रेडर्स के लिए मार्गदर्शिका
      • लॉन्ग स्ट्रैडल (Long Straddle)
      • कवर्ड कॉल (Covered Call)
      • प्रोटेक्टिव पुट (Protective Put)
      • लॉन्ग स्ट्रैंगल (Long Strangle)
      • बुल कॉल स्प्रेड (Bull Call Spread) 
      • बेयर पुट स्प्रेड (Bear Put Spread)
      • 2026 के लिए बेस्ट टिप
  • एडवांस्ड ऑप्शन स्ट्रैटेजीज: अनुभवी ट्रेडर्स के लिए गाइड
      • आयरन कोंडोर (Iron Condor)
      • बटरफ्लाई स्प्रेड (Butterfly Spread)
      • कैलेंडर स्प्रेड (Calendar Spread)
      • रेशियो स्प्रेड (Ratio Spread)
      • बैकस्प्रेड (Backspread)
      • अगला कदम और सलाह
      • टाइम डिके (Time Decay – Theta Risk)
      • वोलेटिलिटी रिस्क (IV Crash)
      • लिवरेज रिस्क (Leverage Risk)
      • असाइनमेंट रिस्क (Assignment Risk)
      • लिक्विडिटी रिस्क (Liquidity Risk)
      • मार्केट रिस्क (Event Risk)
      • ऑपरेशनल रिस्क (Operational Risk)
      • निष्कर्ष: सुरक्षित ट्रेडिंग के नियम

future and options trading

नोट: यह पोस्ट केवल शैक्षणिक और जानकारी के उद्देश्य से है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
trading में जोखिम बहुत अधिक होता है। ट्रेड लेने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइज़र से सलाह जरूर लें।

ऑप्शन प्राइसिंग मॉडल: प्रीमियम कैसे तय होता है?

future and options trading में सफलता केवल बाजार की दिशा पहचानने से नहीं मिलती, बल्कि यह समझने से मिलती है कि ऑप्शन का ‘दाम’ यानी प्रीमियम कैसे तय होता है। इसके लिए दुनिया भर में ब्लैक-स्कोल्स मॉडल (Black-Scholes Model) का उपयोग किया जाता है।

यहाँ उन 6 मुख्य कारकों का विस्तृत विवरण है जो ऑप्शन प्रीमियम को प्रभावित करते हैं:-

वोलेटिलिटी या अस्थिरता (Implied Volatility – IV)

इम्प्लाइड वोलेटिलिटी (IV) ऑप्शन ट्रेडिंग का सबसे रहस्यमयी और प्रभावशाली हिस्सा है। सरल शब्दों में, IV यह बताता है कि आने वाले समय में बाजार में कितनी उथल-पुथल होने की संभावना है।

IV और प्रीमियम का संबंध: जब बाजार में किसी बड़ी घटना (जैसे बजट, चुनाव परिणाम, या कंपनी के नतीजे) की उम्मीद होती है, तो अनिश्चितता बढ़ जाती है। इस अनिश्चितता के कारण ऑप्शन सेलर्स अधिक जोखिम महसूस करते हैं और वे सुरक्षा के लिए अधिक प्रीमियम की मांग करते हैं। परिणामस्वरुप, भले ही शेयर की कीमत (Spot Price) स्थिर रहे, केवल IV बढ़ने से ऑप्शन का प्रीमियम रॉकेट की तरह ऊपर जा सकता है।

उदाहरण से समझें: मान लीजिए निफ्टी 24,000 पर है और 24,200 के कॉल ऑप्शन का दाम ₹100 है। यदि अचानक कोई बड़ी वैश्विक खबर आती है और बाजार में घबराहट फैल जाती है, तो भारत VIX (India VIX) बढ़ जाएगा। ऐसे में, बिना निफ्टी के हिले भी, वह ₹100 वाला ऑप्शन ₹130 या ₹140 का हो सकता है। इसे ही ‘प्रीमियम का फूलना’ (Inflated Premiums) कहते हैं।

Future and Options Trading में IV का महत्व: एक स्मार्ट ट्रेडर के लिए IV को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि:- future and options trading

  1. IV Crush: जब कोई घटना (Event) खत्म हो जाती है (जैसे चुनाव के नतीजे आने के बाद), तो IV अचानक गिर जाता है। इसे ‘IV Crush’ कहते हैं। इसमें ऑप्शन बायर को भारी नुकसान होता है क्योंकि प्रीमियम तेजी से पिघल जाते हैं, भले ही बाजार उनकी दिशा में ही क्यों न हो।

  2. Buy Low, Sell High IV: अनुभवी ट्रेडर्स तब ऑप्शंस खरीदते हैं जब IV कम हो (प्रीमियम सस्ते हों) और तब बेचते हैं जब IV बहुत अधिक हो (प्रीमियम महंगे हों)।

2026 में IV का महत्व: 2026 के मार्केट सिनैरियो में, जहाँ एल्गोरिदम आधारित ट्रेडिंग (Algo Trading) का बोलबाला है, IV में पलक झपकते ही बदलाव आते हैं। नए ट्रेडर्स को ‘इंडिया VIX’ (India VIX) पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। यदि VIX 18-20 से ऊपर है, तो ऑप्शंस बहुत महंगे होंगे और वहां स्टॉप-लॉस हिट होने की संभावना अधिक होगी।

निष्कर्ष: IV वह ‘डर और लालच’ का मीटर है जो भविष्य की चाल का अनुमान लगाता है। यदि आप future and options trading में लंबी अवधि तक टिकना चाहते हैं, तो आपको केवल चार्ट ही नहीं, बल्कि IV के उतार-चढ़ाव को भी मास्टर करना होगा।

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स्पॉट प्राइस (Spot Price)

यह एसेट की वर्तमान बाजार कीमत है। कॉल ऑप्शन के लिए, स्पॉट प्राइस जितना अधिक होगा, प्रीमियम उतना ही ज्यादा होगा। पुट ऑप्शन के लिए इसका उल्टा होता है—स्पॉट प्राइस गिरने पर पुट का प्रीमियम बढ़ता है।

स्ट्राइक प्राइस (Strike Price)

स्ट्राइक प्राइस वह निश्चित मूल्य है जिस पर कॉन्ट्रैक्ट हुआ है। स्पॉट प्राइस और स्ट्राइक प्राइस के बीच की दूरी ही यह तय करती है कि ऑप्शन In-the-Money (ITM) है या Out-of-the-Money (OTM)। ITM ऑप्शंस में इंट्रिंसिक वैल्यू होने के कारण वे महंगे होते हैं। future and options trading

टाइम टू एक्सपायरी (Time to Expiry)

ऑप्शंस को ‘क्षयकारी संपत्ति’ (Decaying Asset) कहा जाता है। एक्सपायरी में जितना अधिक समय बचा होगा, प्रीमियम उतना ही अधिक होगा क्योंकि बाजार के पास चाल दिखाने का समय होता है। जैसे-जैसे एक्सपायरी नजदीक आती है, प्रीमियम की ‘टाइम वैल्यू’ कम होती जाती है। इसे Theta Decay कहते हैं।

इंटरेस्ट रेट (Interest Rate)

ब्याज दरें भी प्रीमियम को प्रभावित करती हैं, हालांकि रिटेल ट्रेडिंग में इसका असर बहुत कम दिखता है। आमतौर पर, ब्याज दरें बढ़ने पर कॉल ऑप्शंस के प्रीमियम थोड़े बढ़ जाते हैं और पुट ऑप्शंस के प्रीमियम थोड़े गिर जाते हैं।

डिविडेंड (Dividend)

यदि किसी स्टॉक की एक्स-डिविडेंड तारीख (Ex-dividend date) ऑप्शन की एक्सपायरी से पहले आती है, तो उसका असर प्रीमियम पर पड़ता है। भारी डिविडेंड की घोषणा होने पर कॉल ऑप्शन के दाम गिर जाते हैं और पुट ऑप्शन के दाम बढ़ जाते हैं, क्योंकि स्टॉक की कीमत डिविडेंड के बराबर नीचे एडजस्ट होती है। future and options trading

निष्कर्ष और 2026 के लिए सुझाव

future and options trading में उतरने से पहले आपको ‘ऑप्शन कैलकुलेटर’ का उपयोग करना सीखना चाहिए। NSE की वेबसाइट पर उपलब्ध Option Strategy Builder आपको यह समझने में मदद करता है कि किसी विशेष स्ट्राइक पर IV या समय बदलने से आपके मुनाफे पर क्या असर पड़ेगा।

बेसिक ऑप्शन स्ट्रैटेजीज: शुरुआती ट्रेडर्स के लिए मार्गदर्शिका

future and options trading में केवल दिशा का अनुमान लगाना काफी नहीं है। स्मार्ट ट्रेडर्स जोखिम को कम करने और मुनाफे की संभावना बढ़ाने के लिए ‘स्ट्रैटेजीज’ का उपयोग करते हैं। यहाँ  प्रमुख रणनीतियाँ दी गई हैं:-

लॉन्ग स्ट्रैडल (Long Straddle)

लॉन्ग स्ट्रैडल एक ऐसी अनूठी रणनीति है जिसमें ट्रेडर को इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि बाजार ऊपर जाएगा या नीचे; उसे बस इस बात से मतलब होता है कि बाजार में एक ‘बड़ी हलचल’ होनी चाहिए। यह रणनीति तब अपनाई जाती है जब किसी बड़े इवेंट (जैसे कंपनी के नतीजे, बजट, या चुनाव) के कारण भारी उतार-चढ़ाव की उम्मीद हो। future and options trading

कैसे काम करती है? इसमें ट्रेडर एक ही स्ट्राइक प्राइस (आमतौर पर At-the-Money – ATM) का एक कॉल ऑप्शन और एक पुट ऑप्शन एक साथ खरीदता है। दोनों की एक्सपायरी डेट भी एक ही होती है।

2026 में प्रासंगिकता और उदाहरण: मान लीजिए निफ्टी अभी 24,000 पर ट्रेड कर रहा है। कल आरबीआई (RBI) की पॉलिसी आने वाली है और आपको पता है कि मार्केट किसी भी तरफ 300-400 पॉइंट भाग सकता है।

  • ट्रेड: आप 24,000 का कॉल (प्रीमियम ₹150) और 24,000 का पुट (प्रीमियम ₹150) खरीदते हैं।

  • कुल लागत: ₹300 (कुल प्रीमियम)।

  • ब्रेक-ईवन: आपका मुनाफा तब शुरू होगा जब निफ्टी या तो 24,300 के ऊपर जाए (24000+300) या 23,700 के नीचे गिरे (24000-300)।

फायदे और जोखिम:

  • असीमित मुनाफा: यदि मार्केट में बहुत बड़ा ‘ब्रेकआउट’ या ‘क्रैश’ आता है, तो एक तरफ का प्रीमियम तो जीरो हो जाएगा लेकिन दूसरी तरफ का प्रीमियम 3-4 गुना बढ़ सकता है।

  • सीमित नुकसान: आपका अधिकतम नुकसान आपके द्वारा चुकाया गया कुल प्रीमियम (इस मामले में ₹300) है।

चुनौतियां (The 2026 Target Challenge): लॉन्ग स्ट्रैडल की सबसे बड़ी दुश्मन है ‘साइडवेज मार्केट’। यदि निफ्टी 24,000 के आसपास ही घूमता रह गया, तो समय बीतने के साथ (Theta Decay) कॉल और पुट दोनों के दाम तेजी से गिरेंगे और आपको भारी नुकसान हो सकता है। 2026 के बाजारों में, जहाँ खबरें बहुत जल्दी डिस्काउंट हो जाती हैं, इस स्ट्रैटेजी को इवेंट से ठीक पहले इस्तेमाल करना और मुनाफा मिलते ही बाहर निकलना (Exit) सबसे महत्वपूर्ण है। future and options trading

निष्कर्ष: लॉन्ग स्ट्रैडल उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो “बाजार कहाँ जाएगा” यह नहीं जानते, लेकिन यह जानते हैं कि “बाजार जहाँ भी जाएगा, बहुत तेजी से जाएगा”। यह विशुद्ध रूप से Volatility Trading है।

कवर्ड कॉल (Covered Call)

यह उन निवेशकों के लिए है जिनके पास पहले से स्टॉक होल्डिंग्स हैं। future and options trading

  • रणनीति: अपने पास मौजूद शेयरों पर ‘आउट-ऑफ-द-मनी’ (OTM) कॉल बेचना।

  • फायदा: इससे आपको प्रीमियम के रूप में अतिरिक्त इनकम मिलती है। यदि स्टॉक बहुत ऊपर नहीं भागता, तो प्रीमियम आपकी पॉकेट में रहता है।

प्रोटेक्टिव पुट (Protective Put)

इसे ‘पोर्टफोलियो इंश्योरेंस’ भी कहा जाता है।

  • रणनीति: स्टॉक होल्ड करने के साथ-साथ एक पुट ऑप्शन खरीदना।

  • फायदा: यदि बाजार अचानक क्रैश हो जाता है, तो पुट में होने वाला मुनाफा आपके शेयरों में होने वाले नुकसान की भरपाई कर देता है।

लॉन्ग स्ट्रैंगल (Long Strangle)

यह स्ट्रैडल जैसा ही है, लेकिन सस्ता है। future and options trading

  • रणनीति: इसमें ATM के बजाय ओटीएम (OTM) कॉल और पुट खरीदे जाते हैं।

  • फायदा: लागत कम आती है, लेकिन प्रॉफिट के लिए मार्केट को स्ट्रैडल के मुकाबले और भी बड़ी चाल (Big Move) दिखानी पड़ती है।

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बुल कॉल स्प्रेड (Bull Call Spread) 

  • रणनीति: एक पास की स्ट्राइक का कॉल खरीदना और एक दूर की स्ट्राइक का कॉल बेचना।

  • फायदा: यह ट्रेड की लागत को कम कर देता है और दिशा गलत होने पर नुकसान को भी सीमित रखता है।

बेयर पुट स्प्रेड (Bear Put Spread)

  • रणनीति: एक पास की स्ट्राइक का पुट खरीदना और एक दूर की स्ट्राइक का पुट बेचना।

  • फायदा: गिरते बाजार में मुनाफा कमाने की यह एक सुरक्षित और कम लागत वाली रणनीति है।


2026 के लिए बेस्ट टिप

future and options trading में किसी भी स्ट्रैटेजी को आजमाने से पहले ‘पे-ऑफ चार्ट’ (Payoff Chart) जरूर देखें। इससे आपको पता चलेगा कि एक्सपायरी पर अलग-अलग कीमतों पर आपका कितना मुनाफा या नुकसान होगा। 

एडवांस्ड ऑप्शन स्ट्रैटेजीज: अनुभवी ट्रेडर्स के लिए गाइड

जब आप बेसिक कॉल और पुट से आगे बढ़ जाते हैं, तब future and options trading में असली खेल ‘कॉम्प्लेक्स स्ट्रैटेजीज’ का शुरू होता है। ये रणनीतियां आपको केवल दिशा पर ही नहीं, बल्कि समय (Time) और अस्थिरता (Volatility) पर भी पैसा कमाने का मौका देती हैं।

आयरन कोंडोर (Iron Condor)

आयरन कोंडोर एक ऐसी रणनीति है जिसका उपयोग तब किया जाता है जब ट्रेडर का मानना होता है कि बाजार एक ‘सीमित दायरे’ (Range-bound) में रहेगा। यह रणनीति उन अनुभवी ट्रेडर्स की पसंदीदा है जो हर महीने कंसिस्टेंट इनकम चाहते हैं। future and options trading

रणनीति की बनावट: इसमें एक साथ चार अलग-अलग ऑप्शंस ट्रेड किए जाते हैं:

  1. एक Out-of-the-Money (OTM) पुट बेचना।

  2. उससे भी नीचे की स्ट्राइक का एक OTM पुट खरीदना (सुरक्षा के लिए)।

  3. एक OTM कॉल बेचना।

  4. उससे भी ऊपर की स्ट्राइक का एक OTM कॉल खरीदना (सुरक्षा के लिए)।

यह कैसे काम करती है? (2026 मार्केट उदाहरण): मान लीजिए निफ्टी 24,000 पर है। आपको लगता है कि इस महीने निफ्टी 23,500 से 24,500 के बीच ही रहेगा।

  • ट्रेड: आप 23,500 का पुट बेचते हैं और 24,500 का कॉल बेचते हैं। अपनी सुरक्षा के लिए आप 23,300 का पुट खरीदते हैं और 24,700 का कॉल खरीदते हैं।

  • नेट क्रेडिट: जब आप यह स्ट्रैटेजी बनाते हैं, तो आपको बाजार से ‘क्रेडिट’ (पैसा) मिलता है क्योंकि बेचने वाले ऑप्शंस का प्रीमियम खरीदने वाले ऑप्शंस से ज्यादा होता है।

फायदे और 2026 Target:

  • मुनाफा: यदि एक्सपायरी तक निफ्टी आपके बेचे गए स्ट्राइक प्राइस (23,500 – 24,500) के बीच में ही बंद होता है, तो सारे ऑप्शंस जीरो हो जाएंगे और जो क्रेडिट आपको शुरू में मिला था, वह आपका पूरा मुनाफा होगा।

  • जोखिम प्रबंधन (Risk Management): चूंकि आपने सुरक्षा के लिए ‘पंख’ (Far OTM ऑप्शंस) खरीदे हैं, इसलिए बाजार अचानक किसी भी तरफ 1000 पॉइंट भी भाग जाए, तो भी आपका नुकसान ‘फिक्स्ड’ और सीमित होता है।

चुनौतियां और बारीकियां: अनुभवी ट्रेडर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती ‘एडजस्टमेंट’ की होती है। 2026 के एल्गोरिदम चालित बाजार में, यदि निफ्टी आपके किसी एक किनारे (Edge) को छूने लगता है, तो आपको अपनी पोजीशन को ‘रोल’ (Roll over) करना पड़ता है। आयरन कोंडोर की सफलता ‘थीटा डिके’ (Time Decay) पर निर्भर करती है। जैसे-जैसे एक्सपायरी नजदीक आती है, आपका मुनाफा बढ़ता जाता है।

निष्कर्ष: आयरन कोंडोर एक “लो रिस्क, लो रिवॉर्ड” स्ट्रैटेजी की तरह लग सकती है, लेकिन सही ‘प्रोबेबिलिटी’ के साथ ट्रेड करने पर यह future and options trading का सबसे शक्तिशाली हथियार साबित होती है। future and options trading

बटरफ्लाई स्प्रेड (Butterfly Spread)

यह एक बहुत ही सटीक (Precise) स्ट्रैटेजी है। इसमें आप तीन अलग-अलग स्ट्राइक प्राइसेस का उपयोग करते हैं। future and options trading

  • संरचना: 1 लॉन्ग ITM कॉल + 2 शॉर्ट ATM कॉल + 1 लॉन्ग OTM कॉल।

  • उपयोग: जब आपको पूरा यकीन हो कि मार्केट बिल्कुल वहीं बंद होगा जहाँ अभी खड़ा है (Low Volatility)। इसकी लागत बहुत कम होती है और मुनाफा बहुत केंद्रित होता है।

कैलेंडर स्प्रेड (Calendar Spread)

इसे ‘टाइम स्प्रेड’ भी कहा जाता है। इसमें आप अलग-अलग एक्सपायरी डेट्स के साथ खेलते हैं।

  • संरचना: करंट महीने का ऑप्शन बेचना और अगले महीने का वही स्ट्राइक वाला ऑप्शन खरीदना।

  • फायदा: पास वाले महीने का प्रीमियम तेजी से गिरता है (Theta), जिसका लाभ ट्रेडर को मिलता है। 2026 में जब प्रीमियम महंगे हों, तब यह काफी प्रभावी होती है।

रेशियो स्प्रेड (Ratio Spread)

इसमें खरीदे गए और बेचे गए कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या बराबर नहीं होती। future and options trading

  • उदाहरण: 1 लॉट कॉल खरीदना और 2 लॉट कॉल बेचना।

  • जोखिम: यदि मार्केट बहुत तेजी से आपकी दिशा में भाग जाए, तो बेचे गए एक्स्ट्रा लॉट्स आपको बड़ा नुकसान दे सकते हैं। यह केवल उन ट्रेडर्स के लिए है जो ‘मार्जिन मैनेजमेंट’ में माहिर हैं।

बैकस्प्रेड (Backspread)

यह रेशियो स्प्रेड का उल्टा है। इसमें आप कम बेचते हैं और ज्यादा खरीदते हैं।

  • उपयोग: यह एक ‘वोलेटिलिटी प्ले’ है। जब आपको लगता है कि बाजार में सुनामी आने वाली है, लेकिन दिशा का पता नहीं है, तब बैकस्प्रेड आपको असीमित मुनाफा दे सकता है।


अगला कदम और सलाह

एडवांस्ड स्ट्रैटेजीज को सीधा रियल मार्केट में न आजमाएं। Sensibull या Zerodha Varsity जैसे टूल्स का उपयोग करके पहले ‘वर्चुअल ट्रेडिंग’ करें। future and options trading

टाइम डिके (Time Decay – Theta Risk)

ऑप्शंस ट्रेडिंग में ‘समय’ (Time) सबसे बड़ा दुश्मन है, विशेष रूप से ऑप्शन खरीदारों (Buyers) के लिए। इसे तकनीकी भाषा में ‘थीटा’ (Theta) कहा जाता है। एक सामान्य स्टॉक निवेश में, यदि आप शेयर होल्ड करते हैं और उसकी कीमत नहीं बदलती, तो आपको कोई नुकसान नहीं होता। लेकिन future and options trading में, यदि बाजार स्थिर रहता है, तो भी ऑप्शन बायर हर मिनट पैसा खोता है।

यह कैसे काम करता है? एक ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट की एक निश्चित ‘एक्सपायरी डेट’ होती है। जैसे-जैसे वह तारीख नजदीक आती है, उस ऑप्शन के सफल होने की संभावना कम होती जाती है। इस घटती संभावना के कारण, ऑप्शन का ‘टाइम वैल्यू’ वाला हिस्सा लगातार कम होता रहता है। इसे ही ‘प्रीमियम का गलना’ कहते हैं। future and options trading

एक्सपायरी का प्रभाव और 2026 का परिदृश्य: 2026 में साप्ताहिक एक्सपायरी की बढ़ती संख्या के कारण, टाइम डिके का प्रभाव अब और भी घातक हो गया है। एक्सपायरी के दिन (जैसे गुरुवार), थीटा डिके की गति चरम पर होती है। सुबह ₹50 में बिकने वाला एक आउट-ऑफ-द-मनी (OTM) ऑप्शन शाम तक ₹0 हो जाता है, भले ही निफ्टी में कोई बड़ी गिरावट न आई हो।

एक बिगिनर के लिए उदाहरण: मान लीजिए आपने शुक्रवार को निफ्टी का एक कॉल ऑप्शन ₹200 में खरीदा। शनिवार और रविवार को बाजार बंद रहता है। जब सोमवार सुबह बाजार खुलता है, भले ही निफ्टी उसी स्तर पर खुले जहाँ शुक्रवार को बंद हुआ था, आपके ऑप्शन की कीमत ₹200 से घटकर ₹170 या ₹180 रह जाएगी। इन दो दिनों का ‘समय’ आपने बाजार को दे दिया, और उसकी कीमत आपके प्रीमियम से कट गई। future and options trading

बचने की रणनीति (2026 Target): अनुभवी ट्रेडर्स ‘टाइम डिके’ के इसी जोखिम से बचने के लिए ‘ऑप्शन सेलिंग’ करते हैं या ‘स्प्रेड्स’ (Spreads) का उपयोग करते हैं। यदि आप एक बायर हैं, तो एक्सपायरी के बहुत करीब ट्रेड न करें और हमेशा ऐसे ऑप्शंस चुनें जिनमें ‘इंट्रिंसिक वैल्यू’ हो। याद रखें, ऑप्शंस एक “बर्फ के टुकड़े” की तरह हैं जो समय की गर्मी से लगातार पिघल रहे हैं। यदि बाजार में तुरंत बड़ी चाल (Momentum) नहीं आई, तो समय आपकी पूरी पूँजी को शून्य कर सकता है। future and options trading

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वोलेटिलिटी रिस्क (IV Crash)

इम्प्लाइड वोलेटिलिटी (IV) में अचानक गिरावट आपके मुनाफे को खा सकती है। उदाहरण के लिए, किसी कंपनी के नतीजों से पहले प्रीमियम बहुत महंगे होते हैं। जैसे ही नतीजे आते हैं, अनिश्चितता खत्म हो जाती है और IV क्रैश हो जाता है। इसे ‘IV Crush’ कहते हैं, जहाँ दिशा सही होने के बावजूद बायर को नुकसान होता है। future and options trading

लिवरेज रिस्क (Leverage Risk)

future and options trading आपको कम पैसों में बड़ी पोजीशन लेने की ताकत देता है। यदि आपके पास ₹10,000 हैं, तो आप ₹10 लाख की वैल्यू वाले निफ्टी कॉन्ट्रैक्ट्स को कंट्रोल कर सकते हैं। यह ‘दोधारी तलवार’ है; बाजार में 1% की विपरीत चाल आपकी पूरी पूँजी साफ कर सकती है।

असाइनमेंट रिस्क (Assignment Risk)

यह जोखिम विशेष रूप से ऑप्शन सेलर्स के लिए है। यदि आप स्टॉक ऑप्शंस बेचते हैं और वे ‘इन-द-मनी’ (ITM) एक्सपायर होते हैं, तो आपको उन शेयरों की फिजिकल डिलीवरी लेनी या देनी पड़ सकती है। इसमें भारी मात्रा में नकदी की आवश्यकता होती है, जो रिटेल ट्रेडर्स के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है। future and options trading

लिक्विडिटी रिस्क (Liquidity Risk)

अनेक स्टॉक्स या ‘डीप आउट-ऑफ-द-मनी’ (Far OTM) ऑप्शंस में ट्रेडर्स बहुत कम होते हैं। यहाँ ‘बिड-आस्क स्प्रेड’ (खरीद-बिक्री मूल्य का अंतर) बहुत बड़ा होता है। इसका मतलब है कि आप खरीद तो लेंगे, लेकिन जब बेचने जाएंगे तो आपको सही खरीदार नहीं मिलेगा, जिससे आपको बड़े ‘स्लिपेज’ (Slippage) का सामना करना पड़ेगा। future and options trading

मार्केट रिस्क (Event Risk)

कोई भी आकस्मिक ग्लोबल न्यूज, युद्ध की खबर, या नीतिगत बदलाव बाजार में ‘गैप-अप’ या ‘गैप-डाउन’ ला सकते हैं। ऐसे में आपका स्टॉप-लॉस काम नहीं करता और आपकी उम्मीद से कहीं ज्यादा बड़ा नुकसान हो सकता है। 

ऑपरेशनल रिस्क (Operational Risk)

तकनीकी युग में, इंटरनेट का जाना, ब्रोकर का ऐप हैंग होना, या ऑर्डर एग्जीक्यूशन में देरी होना भी एक बड़ा जोखिम है। future and options trading में सेकंड्स का महत्व होता है, और एक छोटा सा एरर आपके मुनाफे को बड़े लॉस में बदल सकता है। future and options trading


निष्कर्ष: सुरक्षित ट्रेडिंग के नियम

SEBI की स्टडी के अनुसार, 90% ट्रेडर्स यहाँ नुकसान उठाते हैं। इससे बचने के लिए:

  • अपनी कुल पूँजी का केवल 1-2% हिस्सा ही एक ट्रेड में रिस्क पर लगाएं।

  • हमेशा स्टॉप लॉस (Stop Loss) का उपयोग करें।

  • ग्रीक्स (विशेषकर डेल्टा और वेगा) को मॉनिटर करना सीखें।

इसे और ध्यान से समझने के लिए अगली पोस्ट जरूर पढें

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