bse option chain

दोस्तों, आज हम बात करेंगे bse option chain के बारे में, जो स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग करने वालों के लिए एक कमाल का टूल है। अगर आप नौसिखिए हैं या पहले से ट्रेडिंग करते हैं, लेकिन bse option chain को ठीक से समझ नहीं पाए हैं, तो चिंता मत कीजिए। हम यहां सरल शब्दों में सब कुछ समझाएंगे, जैसे घर पर बैठकर चाय पीते हुए गपशप कर रहे हों। bse option chain क्या है, इसे कैसे इस्तेमाल करें, और इससे कैसे प्रॉफिट कमाएं – सब कुछ कवर करेंगे। चलिए शुरू करते हैं!

नोट: यह पोस्ट केवल शैक्षणिक और जानकारी के उद्देश्य से है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।

इसे मैंने पूरी रिसर्च करके लिखा है और रिसर्च करने में बहुत मेहनत लगती है कृपया इसे आगे दूसरे लोगों को भी शेयर करें ताकि वह भी सीखे

Table of Contents

What is bse option chain?

अरे यार, सबसे पहले तो समझते हैं कि bse option chain आखिर है क्या चीज। bse option chain बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर उपलब्ध एक लिस्ट है, जहां सभी ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स की डिटेल्स दिखती हैं। इसमें कॉल ऑप्शन और पुट ऑप्शन दोनों शामिल होते हैं। आसान भाषा में कहें तो, bse option chain वो जगह है जहां आप देख सकते हैं कि किस स्टॉक या इंडेक्स के लिए कितने स्ट्राइक प्राइस पर ऑप्शन उपलब्ध हैं, और मार्केट का मूड क्या है।

दोस्तों, bse option chain का इस्तेमाल करके आप मार्केट की दिशा का अंदाजा लगा सकते हैं। जैसे, अगर आप सेंसекс पर ट्रेडिंग कर रहे हैं, तो bse option chain से पता चलता है कि लोग ज्यादा खरीद रहे हैं या बेच रहे हैं। ये NSE की ऑप्शन चेन से थोड़ा अलग होता है, लेकिन कॉन्सेप्ट एक ही है। bse option chain में आप ओपन इंटरेस्ट, वॉल्यूम, और प्राइस चेंज जैसी चीजें देखकर स्मार्ट डिसीजन ले सकते हैं।

How to Access BSE Option Chain Easily

अब आते हैं मुद्दे की बात पर – bse option chain को कैसे देखें? दोस्तों, ये बहुत सिंपल है। सबसे पहले BSE की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं, जो है www.bseindia.com। वहां मार्केट्स सेक्शन में डेरिवेटिव्स पर क्लिक करें, और फिर ऑप्शन चेन का ऑप्शन चुनें। अगर लिंक चेंज हो गया हो, तो सर्च करके “bse option chain” टाइप करें।

स्टेप बाय स्टेप देखिए: पहले साइट ओपन करें, फिर सिम्बल सिलेक्ट करें जैसे सेंसекс या कोई स्टॉक। एक्सपायरी डेट चुनें, और बस – bse option chain आपके सामने होगी। मोबाइल पर भी ऐप्स जैसे TradingView या Sensibull से bse option chain देख सकते हैं। याद रखें, bse option chain रियल-टाइम डेटा देती है, तो मार्केट ऑवर्स में चेक करें।

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BSE Option Chain क्या है? पूरी जानकारी आसान भाषा में

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग करते समय BSE Option Chain एक दिशा-सूचक यंत्र (Compass) की तरह काम करती है। अगर आप ऑप्शन ट्रेडिंग में कदम रख रहे हैं, तो इसके एक-एक कॉलम को समझना आपके लिए बहुत ज़रूरी है। आइए, इसे विस्तार से और बेहद सरल शब्दों में समझते हैं।


1. BSE Option Chain की बुनियादी बनावट

जब आप BSE की वेबसाइट पर ऑप्शन चेन खोलते हैं, तो आपको दो मुख्य हिस्से दिखते हैं:

  • Call Options (बाईं ओर): यहाँ उन लोगों का डेटा होता है जो बाज़ार के ऊपर जाने की उम्मीद कर रहे हैं (Bullish)।
  • Put Options (दाईं ओर): यहाँ उन लोगों का डेटा होता है जो बाज़ार के गिरने की उम्मीद कर रहे हैं (Bearish)।
  • Strike Price (बीच में): यह वह केंद्र है जिसके चारों ओर पूरी ट्रेडिंग घूमती है।

2. मुख्य कॉलम और उनका महत्व

स्ट्राइक प्राइस (Strike Price)

इसे ऑप्शन चेन का ‘दिल’ कहा जाता है। यह वह निश्चित कीमत है जिस पर बाज़ार में खरीदारी या बिकवाली का कॉन्ट्रैक्ट होता है।

  • उदाहरण: अगर सेंसेक्स (Sensex) 72,000 पर है, तो 71,800, 72,000 और 72,200 अलग-अलग स्ट्राइक प्राइस होंगे।

ओपन इंटरेस्ट (Open Interest – OI)

यह सबसे जादुई नंबर है। OI हमें बताता है कि कितने कॉन्ट्रैक्ट्स अभी भी बाज़ार में ‘खड़े’ हैं (यानी जिनका सेटलमेंट नहीं हुआ है)।

  • काम की बात: अगर किसी स्ट्राइक प्राइस पर कॉल साइड में बहुत ज़्यादा OI है, तो वह लेवल बाज़ार के लिए एक ‘रेसिस्टेंस’ (रुकावट) का काम करेगा। वहीं पुट साइड में ज़्यादा OI ‘सपोर्ट’ (सहारा) का काम करता है।

LTP (Last Traded Price)

यह उस ऑप्शन का ‘करंट भाव’ या प्रीमियम है। जैसे-जैसे बाज़ार ऊपर या नीचे जाता है, प्रीमियम की कीमतें भी तेज़ी से बदलती हैं।

IV (Implied Volatility)

IV यह बताता है कि आने वाले समय में बाज़ार में कितनी हलचल या ‘डर’ है।

  • अगर IV बढ़ रहा है, तो ऑप्शन के दाम महंगे हो जाते हैं।
  • अगर IV घट रहा है, तो ऑप्शन सस्ते होने लगते हैं।

3. ITM, ATM और OTM का गणित

नए ट्रेडर्स अक्सर यहाँ उलझ जाते हैं। आइए इसे एक सरल उदाहरण से समझते हैं (मान लीजिए शेयर का भाव ₹500 है):

Sheet Link

टिप: ITM ऑप्शन महंगे होते हैं लेकिन सुरक्षित माने जाते हैं, जबकि OTM ऑप्शन सस्ते होते हैं पर उनमें जोखिम ज़्यादा होता है।


4. BSE Option Chain से मार्केट सेंटीमेंट कैसे पहचानें?

ऑप्शन चेन सिर्फ डेटा नहीं, बाज़ार की भावना है। इसे समझने के दो तरीके हैं:

  1. बुलिश सेंटीमेंट (तेज़ी): अगर आप देखते हैं कि पुट साइड (Put Side) में भारी मात्रा में OI बढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि बड़े ट्रेडर्स बाज़ार को नीचे गिरते हुए नहीं देख रहे हैं। यह खरीदारी का संकेत हो सकता है।
  2. बेयरिश सेंटीमेंट (मंदी): अगर कॉल साइड (Call Side) में OI तेज़ी से बढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि ऊपर के स्तर पर भारी बिकवाली का दबाव है। बाज़ार यहाँ से गिर सकता है।

5. ध्यान रखने योग्य कुछ बातें (Pro-Tips)

  • लिक्विडिटी चेक करें: हमेशा उन स्ट्राइक प्राइस में ट्रेड करें जहाँ ‘वॉल्यूम’ और ‘OI’ ज़्यादा हो। कम वॉल्यूम वाले ऑप्शन में आप फंस सकते हैं।
  • एक्सपायरी का ध्यान रखें: BSE के ऑप्शंस की एक निश्चित एक्सपायरी डेट होती है। जैसे-जैसे एक्सपायरी नज़दीक आती है, OTM ऑप्शंस की वैल्यू तेज़ी से ज़ीरो (0) होने लगती है। इसे ‘Time Decay’ कहते हैं।

BSE Option Chain को समझना रॉकेट साइंस नहीं है। यह सिर्फ खरीदारों और विक्रेताओं के बीच चल रही रस्साकशी का एक चार्ट है। अगर आप इसे रोज़ाना ध्यान से देखेंगे, तो आप बाज़ार की चाल को पहले ही भांपना शुरू कर देंगे।

BSE Option Chain: विस्तार से समझें स्ट्राइक प्राइस, OI और PCR

पिछले सेक्शन में हमने बुनियादी बातों को समझा। अब आइए BSE Option Chain के उन एडवांस हिस्सों पर चलते हैं जो बड़े ट्रेडर्स की पहली पसंद होते हैं।

1. स्ट्राइक प्राइस: ऑप्शन चेन का मुख्य केंद्र

जैसा कि हमने चर्चा की, BSE Option Chain में स्ट्राइक प्राइस बीच के कॉलम में होता है। यह बाज़ार के अलग-अलग पड़ावों को दर्शाता है।

इसे तीन श्रेणियों में बाँटा जाता है:

  • ATM (At The Money): जहाँ बाज़ार अभी खड़ा है। (जैसे: निफ्टी 24000 पर है, तो 24000 का स्ट्राइक ATM है)।
  • ITM (In The Money): कॉल के लिए नीचे की स्ट्राइक और पुट के लिए ऊपर की स्ट्राइक। इनमें ‘इंट्रिंसिक वैल्यू’ होती है।
  • OTM (Out Of The Money): कॉल के लिए ऊपर की स्ट्राइक और पुट के लिए नीचे की। ये केवल उम्मीद पर टिके होते हैं और एक्सपायरी पर अक्सर शून्य हो जाते हैं।

2. ओपन इंटरेस्ट (OI) और वॉल्यूम: बाज़ार की असली ताकत

अगर स्ट्राइक प्राइस बाज़ार का रास्ता है, तो Open Interest (OI) और Volume उस पर दौड़ने वाली गाड़ियाँ हैं।

  • OI (ओपन इंटरेस्ट): यह बताता है कि कितने सौदे अभी भी बाज़ार में एक्टिव हैं।
    • OI में बदलाव (Change in OI): अनुभवी ट्रेडर्स केवल कुल OI नहीं, बल्कि ‘OI Change’ पर नज़र रखते हैं। यह बताता है कि आज के दिन नए कॉन्ट्रैक्ट्स बन रहे हैं या लोग डरकर भाग रहे हैं (Unwinding)।
    • संकेत: अगर कीमत ऊपर जा रही है और OI भी बढ़ रहा है, तो यह ‘लॉन्ग बिल्डअप’ है—यानी बाज़ार में मजबूती है।
  • वॉल्यूम: यह आज के दिन हुए कुल लेन-देन की संख्या है। हाई वॉल्यूम का मतलब है कि उस स्ट्राइक पर भारी घमासान चल रहा है।

3. PCR Ratio (पुट-कॉल रेशियो): बाज़ार का थर्मामीटर

BSE Option Chain का सबसे शक्तिशाली इंडिकेटर PCR है। इसे निकालने का तरीका बहुत सरल है:

इसे कैसे पढ़ें?

  1. PCR > 1.0: इसका मतलब है कि पुट राइटर (बुल) हावी हैं। बाज़ार में मंदी की संभावना कम है (Oversold ज़ोन भी हो सकता है)।
  2. PCR < 0.7: इसका मतलब है कि कॉल राइटर (बेयर) हावी हैं। बाज़ार में तेज़ी की उम्मीद कम है (Overbought ज़ोन भी हो सकता है)।
  3. PCR = 1.0: बाज़ार न्यूट्रल या रेंज-बाउंड रह सकता है।

BSE Option Chain को ‘Pro’ की तरह कैसे पढ़ें? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)

सिर्फ डेटा देखना काफी नहीं है, उस डेटा को ‘डिकोड’ करना ही एक सफल ट्रेडर की पहचान है। आइए जानते हैं वे सीक्रेट्स जो प्रो-ट्रेडर्स BSE Option Chain देखते समय इस्तेमाल करते हैं।

1. सही एक्सपायरी (Expiry) का चुनाव

BSE की वेबसाइट पर सबसे पहले सही एक्सपायरी डेट चुनें।

  • इंट्राडे ट्रेडर्स: अक्सर मौजूदा हफ्ते (Weekly) की एक्सपायरी पर ध्यान देते हैं।
  • पोजीशनल ट्रेडर्स: मंथली एक्सपायरी का डेटा देखते हैं ताकि बाज़ार का बड़ा ट्रेंड समझ सकें।

2. कलर कोडिंग और ATM की पहचान

जब आप BSE Option Chain को देखते हैं, तो कुछ हिस्सा सफ़ेद और कुछ हल्का पीला (Yellow) दिखाई देता है।

  • पीला रंग (Shaded Area): यह ‘In The Money’ (ITM) ऑप्शंस को दर्शाता है।
  • सफ़ेद रंग (Unshaded Area): यह ‘Out Of The Money’ (OTM) ऑप्शंस को दर्शाता है।
  • जहाँ ये दोनों रंग मिलते हैं, वही ATM (At The Money) स्ट्राइक होती है।

3. सपोर्ट और रेसिस्टेंस की पहचान (The OI Method)

प्रो-ट्रेडर्स स्ट्राइक प्राइस को केवल नंबर नहीं, बल्कि दीवारों की तरह देखते हैं:

  • मज़बूत सपोर्ट (Support): पुट (Put) साइड में जिस स्ट्राइक प्राइस पर सबसे ज़्यादा ‘ओपन इंटरेस्ट’ (OI) हो, वह बाज़ार के लिए एक मज़बूत फर्श (Floor) का काम करता है। बाज़ार यहाँ से नीचे गिरने में संघर्ष करेगा।
  • मज़बूत रेसिस्टेंस (Resistance): कॉल (Call) साइड में जिस स्ट्राइक पर सबसे ज़्यादा OI हो, वह बाज़ार के लिए एक छत (Ceiling) की तरह है। बाज़ार को यहाँ से ऊपर जाने में दिक्कत होगी।

4. OI चेंज: बाज़ार की अगली चाल का सुराग

केवल कुल OI न देखें, बल्कि ‘OI Change’ पर गौर करें। यह लाइव बाज़ार की हलचल बताता है:

  • तेज़ी का संकेत: यदि कॉल साइड का OI घट रहा है और पुट साइड का OI तेज़ी से बढ़ रहा है, तो समझ जाइए कि मंदी करने वाले भाग रहे हैं और खरीदार हावी हैं।
  • मंदी का संकेत: यदि पुट साइड का OI घट रहा है और कॉल साइड का OI बढ़ रहा है, तो बाज़ार में गिरावट की संभावना बढ़ जाती है।

5. रियल-लाइफ एक्जाम्पल

मान लीजिए सेंसेक्स 72,500 पर है। आप देखते हैं कि 73,000 की कॉल पर भारी OI बढ़ रहा है, लेकिन 72,000 की पुट पर OI घट रहा है। यह साफ़ संकेत है कि ट्रेडर्स को ऊपर की तरफ डर लग रहा है और सपोर्ट कमज़ोर हो रहा है—यानी बाज़ार गिर सकता है।

BSE Option Chain: ट्रेडिंग की 7 दमदार रणनीतियाँ (Strategies)

डेटा को समझना एक बात है, लेकिन उस पर ट्रेड लेना दूसरी। यहाँ 7 ऐसी रणनीतियाँ दी गई हैं जिनका उपयोग प्रोफेशनल ट्रेडर्स BSE Option Chain के माध्यम से करते हैं:

1. OI बिल्डअप (OI Build-up) को डिकोड करना

बाज़ार किस दिशा में मुड़ेगा, यह OI और कीमत के तालमेल से पता चलता है:

  • Long Build-up: जब स्ट्राइक प्राइस (LTP) बढ़े और OI भी बढ़े। (तेज़ी का संकेत)
  • Short Covering: जब प्राइस बढ़े लेकिन OI घटे। (मंदी वाले भाग रहे हैं—अचानक तेज़ी आ सकती है)
  • Short Build-up: जब प्राइस घटे और OI बढ़े। (मंदी का संकेत)

2. PCR (Put-Call Ratio) के साथ रिवर्सल पहचानना

PCR बाज़ार के ‘ओवरबॉट’ या ‘ओवरसोल्ड’ होने का संकेत देता है:

  • Bullish Trade: जब PCR 0.6 से 0.7 के बीच हो, तो इसका मतलब है कि बाज़ार काफी गिर चुका है और यहाँ से रिकवरी (तेज़ी) आ सकती है।
  • Bearish Trade: जब PCR 1.3 से 1.5 से ऊपर हो, तो इसका मतलब है कि बाज़ार में बहुत ज़्यादा खरीदारी हो चुकी है और अब गिरावट आ सकती है।

3. मैक्स पेन थ्योरी (Max Pain Theory)

यह सिद्धांत कहता है कि एक्सपायरी के दिन बाज़ार उस स्तर पर बंद होगा जहाँ ‘ऑप्शन सेलर्स’ को सबसे कम नुकसान हो।

  • कैसे पहचानें? BSE Option Chain में वह स्ट्राइक प्राइस देखें जहाँ कॉल और पुट दोनों का कुल OI (Combined OI) सबसे अधिक है। अक्सर बाज़ार एक्सपायरी पर उसी पॉइंट के इर्द-गिर्द घूमता है।

4. हाई IV (Implied Volatility) ट्रेडिंग

IV हमें प्रीमियम की ‘महंगाई’ बताता है।

  • रणनीति: जब IV बहुत अधिक हो (जैसे किसी इवेंट या न्यूज़ के समय), तो ऑप्शन खरीदे नहीं, बल्कि बेचे (Sell) जाते हैं। क्योंकि जैसे ही खबर निकल जाएगी, IV गिरेगा और ऑप्शन के दाम तेज़ी से कम होंगे (इसे IV Crush कहते हैं)।

5. शॉर्ट स्ट्रैडल (Short Straddle) और स्ट्रैंगल

अगर आपको लगता है कि बाज़ार एक दायरे (Range) में रहेगा:

  • कैसे करें? BSE Option Chain में ATM कॉल और ATM पुट दोनों को एक साथ बेच दें। जब तक बाज़ार उस दायरे में रहेगा, समय बीतने के साथ (Time Decay) आपको दोनों तरफ से प्रीमियम का लाभ मिलेगा।

6. OI आधारित सपोर्ट और रेजिस्टेंस

यह इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए सबसे भरोसेमंद तरीका है:

  • सपोर्ट: पुट साइड में सबसे ऊँचा OI टावर।
  • रेजिस्टेंस: कॉल साइड में सबसे ऊँचा OI टावर।
  • अगर बाज़ार रेजिस्टेंस के पास पहुँचता है और कॉल OI और बढ़ने लगता है, तो वहाँ से ‘शॉर्ट’ (बिकवाली) का मौका बनता है।

7. डेली चेंज (Change in OI) को ट्रैक करना

कुल OI से ज़्यादा ज़रूरी है ‘आज’ क्या हुआ।

  • अगर आप देखते हैं कि आज अचानक किसी दूर की ओटीएम (OTM) पुट में भारी OI बढ़ गया है, तो इसका मतलब है कि बड़े प्लेयर्स को बाज़ार के गिरने का डर नहीं है और उन्होंने वहां ‘सपोर्ट’ बना लिया है।

BSE Option Chain विश्लेषण में 5 सामान्य गलतियाँ (जो आपको नहीं करनी चाहिए)

ऑप्शन चेन का डेटा देखना आसान है, लेकिन उसे गलत तरीके से समझना खतरनाक हो सकता है। यहाँ वे 5 बड़ी गलतियाँ दी गई हैं जिनसे हर ट्रेडर को बचना चाहिए:

1. सिर्फ कीमत (LTP) देखना और OI को नज़रअंदाज़ करना

ज़्यादातर नए ट्रेडर्स सिर्फ यह देखते हैं कि किस ऑप्शन का प्रीमियम (Price) तेज़ी से बढ़ रहा है और वे उसे खरीद लेते हैं।

  • गलती क्यों है? बिना ओपन इंटरेस्ट (OI) के कीमत का बढ़ना एक ‘ट्रैप’ हो सकता है।
  • सही तरीका: हमेशा देखें कि क्या कीमत के साथ-साथ OI भी बढ़ रहा है? अगर कीमत बढ़ रही है लेकिन OI घट रहा है, तो इसका मतलब है कि यह तेज़ी टिकाऊ नहीं है।

2. एक्सपायरी डेट चुनने में लापरवाही

BSE Option Chain में साप्ताहिक (Weekly) और मासिक (Monthly) एक्सपायरी होती है।

  • गलती क्यों है? कई बार ट्रेडर्स गलती से अगले हफ्ते या पिछले महीने की एक्सपायरी का डेटा देख लेते हैं, जिससे उन्हें बाज़ार की गलत तस्वीर दिखाई देती है।
  • सही तरीका: ट्रेड लेने से पहले ड्रॉपडाउन मेनू में एक्सपायरी डेट को दोबारा चेक करें। याद रखें, एक्सपायरी के जितना करीब आप ट्रेड करेंगे, ‘टाइम डिके’ (Time Decay) का खतरा उतना ही ज़्यादा होगा।

3. PCR (Put-Call Ratio) को बिना सोचे-समझे इस्तेमाल करना

पाठक अक्सर सोचते हैं कि PCR 1 से ऊपर है तो बस खरीद लो, या नीचे है तो बेच दो।

  • गलती क्यों है? PCR एक ‘लैगिंग’ इंडिकेटर हो सकता है। कभी-कभी बहुत हाई PCR (जैसे 1.6) का मतलब यह होता है कि मार्केट अब थक चुका है और यहाँ से गिर सकता है (Overbought)।
  • सही तरीका: PCR को हमेशा सपोर्ट और रेजिस्टेंस के साथ मिलाकर देखें। इसे अकेला सिग्नल न मानें।

4. वॉल्यूम (Volume) के महत्व को कम आंकना

कुछ ट्रेडर्स उन स्ट्राइक प्राइस पर ट्रेड ले लेते हैं जहाँ OI तो है पर वॉल्यूम बहुत कम है।

  • गलती क्यों है? कम वॉल्यूम का मतलब है कि वहां खरीदार और विक्रेता कम हैं। ऐसी स्थिति में आप ऑप्शन खरीद तो लेंगे, लेकिन जब बेचने जाएंगे तो कोई खरीदार नहीं मिलेगा (इसे ‘Liquidity Risk’ कहते हैं)।
  • सही तरीका: हमेशा उन स्ट्राइक्स में ट्रेड करें जहाँ वॉल्यूम और OI दोनों ज़्यादा हों।

5. बिना प्रैक्टिस और बैकटेस्टिंग के सीधे ट्रेड करना

ऑप्शन चेन को समझना एक कला है जो अनुभव से आती है।

  • गलती क्यों है? सिर्फ एक लेख पढ़कर असली पैसे से ट्रेडिंग करना जोखिम भरा है। बाज़ार की चाल अक्सर डेटा के विपरीत भी हो सकती है।
  • सही तरीका: पहले 2-4 हफ्ते BSE Option Chain के डेटा को लाइव मार्केट में सिर्फ ऑब्ज़र्व (Observe) करें या ‘पेपर ट्रेडिंग’ करें। देखें कि आपके द्वारा पहचाने गए सपोर्ट और रेजिस्टेंस कितने सटीक बैठते हैं।

शुरुआत करने वालों (Beginners) के लिए BSE Option Chain के फायदे

अगर आप शेयर बाज़ार में नए हैं, तो BSE Option Chain आपके लिए किसी रोडमैप से कम नहीं है। इसके इस्तेमाल के कुछ प्रमुख फायदे यहाँ दिए गए हैं:

1. बाज़ार के मूड (Sentiment) की सटीक पहचान

बिना किसी न्यूज़ या अफवाह के, आप सिर्फ ऑप्शन चेन देखकर यह जान सकते हैं कि बाज़ार का असली मूड क्या है। यह आपको बताता है कि बड़े निवेशक (Smart Money) तेज़ी की तरफ हैं या मंदी की तरफ।

2. बेहतरीन रिस्क मैनेजमेंट (Risk Management)

ऑप्शन चेन आपको पहले ही बता देती है कि बाज़ार के लिए ‘खतरे का स्तर’ (Resistance) और ‘सुरक्षा का स्तर’ (Support) कहाँ है। इससे आप अपना Stop Loss सही जगह पर लगा सकते हैं और भारी नुकसान से बच सकते हैं।

3. सही स्ट्राइक प्राइस चुनने में मदद

अक्सर नए ट्रेडर्स गलत स्ट्राइक प्राइस चुनकर अपना पैसा खो देते हैं। BSE Option Chain आपको यह समझने में मदद करती है कि कौन सा ऑप्शन ‘इन द मनी’ (ITM) है और किसके एक्सपायरी तक ज़ीरो होने की संभावना कम है।

4. प्रॉफिटेबल ट्रेड्स की खोज

वॉल्यूम और OI के डेटा का इस्तेमाल करके आप उन मौकों को पहचान सकते हैं जहाँ बाज़ार में अचानक बड़ा मूवमेंट आने वाला है। यह आपको ‘तुक्केबाज़ी’ के बजाय ‘डेटा’ के आधार पर ट्रेड लेने में मदद करता है।

5. एक मुफ्त ‘ट्रेडिंग गुरु’ की तरह

जैसा कि हमने कहा, BSE Option Chain एक शिक्षक की तरह है। जैसे-जैसे आप रोज़ाना इसके डेटा को लाइव मार्केट में ट्रैक करते हैं, बाज़ार की चाल को समझने की आपकी क्षमता (Trading Edge) अपने आप बेहतर होती जाती है।

Advanced Tips: BSE Option Chain के छिपे हुए राज़ (Hidden Secrets)

अगर आप BSE Option Chain को एक मास्टर की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो इन तीन एडवांस तकनीकों को अपनी ट्रेडिंग रणनीति में शामिल करें:

1. OI अनवाइंडिंग (OI Unwinding) को पहचानें

OI का बढ़ना अगर नई पोजीशन बनने का संकेत है, तो OI का घटना (Unwinding) पोजीशन बंद होने का संकेत है।

  • सीक्रेट: अगर बाज़ार एक रेजिस्टेंस के पास है और आप देखते हैं कि कॉल साइड में OI तेज़ी से घट रहा है, तो इसे ‘Short Covering’ कहते हैं। इसका मतलब है कि मंदी करने वाले डर रहे हैं और बाज़ार अब एक बहुत बड़ा ऊपर की तरफ ब्रेकआउट देने वाला है। यही वह समय है जब ‘Jackpot’ ट्रेड्स बनते हैं।

2. मल्टी-कंफर्मेशन: RSI के साथ कॉम्बिनेशन

सिर्फ ऑप्शन चेन के भरोसे ट्रेड न लें। इसे टेक्निकल इंडिकेटर्स के साथ मिलाएँ:

  • रणनीति: अगर BSE Option Chain में PCR 0.7 से नीचे (Oversold) है और उसी समय चार्ट पर RSI इंडिकेटर भी 30 के नीचे है और ऊपर की तरफ मुड़ रहा है, तो यह ‘डबल कंफर्मेशन’ है कि यहाँ से खरीदारी का एक बेहतरीन मौका है।

3. 15-मिनट OI चेंज (Intraday Tracking)

प्रो-ट्रेडर्स पूरे दिन के डेटा का इंतज़ार नहीं करते।

  • रणनीति: इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए हर 15 मिनट में ‘Change in OI’ को ट्रैक करें। यदि पिछले 15-30 मिनट में किसी खास पुट स्ट्राइक पर अचानक बहुत ज़्यादा OI बढ़ा है, तो समझ जाइए कि बाज़ार को वहां एक इमिडिएट ‘सपोर्ट’ मिल गया है। यह आपको बाज़ार के मुड़ने से पहले ही एंट्री दिला सकता है।

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