Options trading example

 

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Options trading example for beginners with Best 2026 Target

फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस ट्रेडिंग भारतीय शेयर बाजार में डेरिवेटिव्स का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह ट्रेडर्स को स्टॉक, इंडेक्स, कमोडिटी और करेंसी पर सट्टेबाजी करने की सुविधा देता है बिना वास्तविक एसेट को खरीदे या बेचे। F&O सेगमेंट में दो मुख्य इंस्ट्रूमेंट्स हैं: फ्यूचर्स और ऑप्शंस। इस लेख में हम मुख्य रूप से ऑप्शंस ट्रेडिंग पर फोकस करेंगे, जो F&O का एक हिस्सा है। ऑप्शंस ट्रेडिंग जोखिम भरी लेकिन लाभदायक हो सकती है, और इसमें सफल होने के लिए गहन ज्ञान जरूरी है। Options trading example

भारतीय बाजार में F&O ट्रेडिंग मुख्य रूप से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर होती है। NSE पर F&O सेगमेंट 2000 में शुरू हुआ था, और आज यह दुनिया के सबसे बड़े डेरिवेटिव मार्केट्स में से एक है। 2026 तक, F&O वॉल्यूम में और वृद्धि हुई है, खासकर रिटेल ट्रेडर्स की भागीदारी से। लेकिन सेबी (SEBI) ने जोखिम को कम करने के लिए कई नियम लागू किए हैं, जैसे बढ़ी हुई मार्जिन रिक्वायरमेंट्स और ट्रेडिंग घंटों में बदलाव।

इस गाइड में हम ऑप्शंस ट्रेडिंग की बेसिक्स से लेकर एडवांस्ड स्ट्रैटेजीज, रिस्क मैनेजमेंट, भारतीय रेगुलेशंस, टैक्सेशन और प्रैक्टिकल टिप्स तक सब कुछ कवर करेंगे। यह लगभग 4000 शब्दों का विस्तृत लेख है, जो शुरुआती से लेकर एक्सपीरियंस्ड ट्रेडर्स के लिए उपयोगी होगा। ध्यान दें: ट्रेडिंग में पैसे का नुकसान हो सकता है, इसलिए केवल वो पूंजी लगाएं जो आप खोने को तैयार हों। Options trading example

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F&O सेगमेंट क्या है? ऑप्शंस ट्रेडिंग की पूरी जानकारी

शेयर बाजार में निवेश के दो मुख्य तरीके होते हैं: कैश मार्केट और डेरिवेटिव मार्केट। डेरिवेटिव मार्केट को ही हम F&O (Futures & Options) कहते हैं। 2026 में SEBI के नए नियमों के बाद, इस सेगमेंट को समझना और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

F&O क्या है? (What is F&O?)

F&O का अर्थ है फ्यूचर्स (Futures) और ऑप्शंस (Options)। ये ‘डेरिवेटिव्स’ होते हैं, जिसका अर्थ है कि इनका अपना कोई मूल्य नहीं होता, बल्कि इनकी वैल्यू किसी अंडरलाइंग एसेट (जैसे निफ्टी, बैंक निफ्टी, रिलायंस का स्टॉक, गोल्ड या USD-INR) से आती है। Options trading example

फ्यूचर्स (Futures) क्या है?

फ्यूचर्स एक कानूनी अनुबंध (Contract) है जिसमें खरीदार और विक्रेता एक भविष्य की तारीख (Expiry Date) पर, एक तय कीमत पर एसेट को खरीदने या बेचने के लिए बाध्य (Obligated) होते हैं।

  • उदाहरण: यदि आप निफ्टी फ्यूचर्स ₹24,000 पर खरीदते हैं, तो एक्सपायरी के दिन चाहे बाजार ₹23,000 हो या ₹25,000, आपको अनुबंध की शर्तों के अनुसार सेटलमेंट करना ही होगा।


ऑप्शंस (Options) क्या है?

ऑप्शंस ट्रेडिंग बिगिनर्स के लिए थोड़ा अलग है। यह खरीदार को एक अधिकार (Right) देता है, लेकिन कोई बाध्यता (Obligation) नहीं देता। Options trading example

  • बायर (Buyer): इसे अधिकार मिलता है, जिसके बदले यह ‘प्रीमियम’ चुकाता है।

  • सेलर (Seller): इसे ‘प्रीमियम’ मिलता है, लेकिन इसका जोखिम (Risk) असीमित होता है क्योंकि इसे बायर की शर्त माननी पड़ती है।

Options Trading Example for Beginners with Best 2026 Target

बिगिनर्स के लिए ऑप्शंस को समझने का सबसे अच्छा तरीका ‘कॉल’ और ‘पुट’ के उदाहरण हैं। 2026 के बाजार की अस्थिरता को देखते हुए, आपका Target हमेशा छोटे और सुरक्षित प्रॉफिट का होना चाहिए। Options trading example

A. कॉल ऑप्शन (Call Option) – जब बाजार ऊपर जाने की उम्मीद हो

मान लीजिए निफ्टी अभी 24,000 पर है। आपको लगता है कि यह 24,200 तक जाएगा।

  • स्ट्राइक प्राइस: 24,100 (CE)

  • प्रीमियम: ₹100

  • लॉट साइज: 25 यूनिट्स (कुल लागत: ₹2,500)

  • परिणाम: अगर एक्सपायरी पर निफ्टी 24,300 पहुंच जाता है, तो आपका ऑप्शन ₹200 का हो जाएगा। आपका मुनाफा: (200 – 100) = ₹100 प्रति यूनिट।

B. पुट ऑप्शन (Put Option) – जब बाजार नीचे जाने की उम्मीद हो

मान लीजिए निफ्टी 24,000 पर है और आपको गिरावट की उम्मीद है।

  • स्ट्राइक प्राइस: 23,900 (PE)

  • प्रीमियम: ₹80

  • परिणाम: अगर निफ्टी गिरकर 23,700 आ जाता है, तो आपका पुट ऑप्शन ₹200 का हो जाएगा। आपका मुनाफा: (200 – 80) = ₹120 प्रति यूनिट।

2026 में SEBI के नए नियम और सावधानियां

2026 में ऑप्शंस ट्रेडिंग काफी बदल गई है। रिटेल ट्रेडर्स की सुरक्षा के लिए SEBI ने कुछ कड़े कदम उठाए हैं:- Options trading example

  1. साप्ताहिक एक्सपायरी (Weekly Expiry): अब हर इंडेक्स की साप्ताहिक एक्सपायरी उपलब्ध नहीं है; इसे सीमित कर दिया गया है ताकि अत्यधिक सट्टेबाजी कम हो सके।

  2. हाई-रिस्क वॉर्निंग: अब ब्रोकर्स को ट्रेड से पहले यूजर को उनकी पिछली लॉस हिस्ट्री और रिस्क मीटर दिखाना अनिवार्य है।

  3. मार्जिन नियम: इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए मार्जिन नियमों को सख्त किया गया है ताकि ट्रेडर्स अपनी क्षमता से अधिक रिस्क (Over-leverage) न लें।


ऑप्शंस के प्रकार: अमेरिकन vs यूरोपियन

  • यूरोपियन ऑप्शंस (Index Options): इन्हें केवल एक्सपायरी के दिन ही ‘एक्सरसाइज’ किया जा सकता है। भारत में निफ्टी और बैंक निफ्टी इसी स्टाइल के हैं।

  • अमेरिकन ऑप्शंस (Stock Options): इन्हें एक्सपायरी से पहले कभी भी ‘एक्सरसाइज’ किया जा सकता है। भारत में व्यक्तिगत स्टॉक्स के ऑप्शंस इसी श्रेणी में आते हैं।


निष्कर्ष और Best 2026 Target Strategy

एक बिगिनर के तौर पर 2026 में आपका मुख्य लक्ष्य “Capital Preservation” (पूँजी बचाना) होना चाहिए। Options trading example

  • Target: महीने का 5-10% कंसिस्टेंट रिटर्न पाने की कोशिश करें, न कि एक दिन में पैसा डबल करने की।

  • Stop Loss: हमेशा स्टॉप लॉस का उपयोग करें क्योंकि लिवरेज एक दोधारी तलवार है।

ऑप्शंस ट्रेडिंग के मुख्य शब्द: एक विस्तृत मार्गदर्शिका (2026 अपडेटेड)

ऑप्शंस ट्रेडिंग की दुनिया में कदम रखने से पहले इसकी शब्दावली (Terminology) को समझना अनिवार्य है। यदि आप Options trading example for beginners with Best 2026 Target की तलाश में हैं, तो ये 11 बिंदु आपकी नींव मजबूत करेंगे।

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स्ट्राइक प्राइस (Strike Price)

स्ट्राइक प्राइस ऑप्शंस ट्रेडिंग का वह केंद्र बिंदु है जिसके चारों ओर पूरा ट्रेड घूमता है। सरल शब्दों में, स्ट्राइक प्राइस वह पूर्व-निर्धारित कीमत है जिस पर एक ऑप्शन खरीदार (Buyer) एसेट को खरीदने या बेचने के अपने अधिकार का उपयोग कर सकता है। Options trading example

स्ट्राइक प्राइस का महत्व: जब आप कोई ऑप्शन चुनते हैं, तो आप वास्तव में एक भविष्यवाणी कर रहे होते हैं कि बाजार एक निश्चित समय सीमा के भीतर इस ‘स्ट्राइक प्राइस’ को पार करेगा या नहीं। NSE (National Stock Exchange) पर निफ्टी के लिए ये स्ट्राइक प्राइस आमतौर पर 50 पॉइंट्स के अंतराल पर उपलब्ध होते हैं (जैसे 24000, 24050, 24100)।

यह कैसे काम करता है? (Beginner Example): मान लीजिए निफ्टी अभी 24,000 पर ट्रेड कर रहा है। आपको लगता है कि मार्केट 24,200 तक जाएगा। यहाँ आपके पास कई विकल्प हैं। आप 24,000 की स्ट्राइक चुन सकते हैं, 24,100 की, या 24,200 की। जिस स्ट्राइक प्राइस को आप चुनते हैं, वह सीधे तौर पर आपके प्रीमियम और जीतने की संभावना (Probability of Profit) को प्रभावित करती है।

2026 Target और स्ट्राइक प्राइस का चयन: 2026 के मार्केट डायनामिक्स के अनुसार, सही स्ट्राइक प्राइस का चुनाव ही एक सफल ट्रेडर और एक सट्टेबाज के बीच का अंतर है। बिगिनर्स अक्सर सबसे सस्ती स्ट्राइक प्राइस (जो वर्तमान भाव से बहुत दूर होती है) चुनते हैं, जिसे ‘Deep OTM’ कहा जाता है। हालांकि यह सस्ता लगता है, लेकिन इसकी एक्सपायरी पर जीरो होने की संभावना 99% होती है।

रणनीति: 2026 में SEBI के नए रिस्क डिस्क्लोजर नियमों के बाद, विशेषज्ञों का सुझाव है कि शुरुआती ट्रेडर्स को हमेशा ‘At-the-Money’ (ATM) या ‘In-the-Money’ (ITM) स्ट्राइक प्राइस पर ही ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यदि आपका लक्ष्य (Target) महीने का 5-10% रिटर्न कमाना है, तो ऐसी स्ट्राइक चुनें जहाँ डेल्टा (Delta) कम से कम 0.50 हो। इससे बाजार की दिशा सही होने पर आपका प्रीमियम तेजी से बढ़ेगा।

निष्कर्ष: स्ट्राइक प्राइस केवल एक नंबर नहीं है; यह आपके रिस्क और रिवॉर्ड का पैमाना है। गलत स्ट्राइक का चुनाव तब भी आपको नुकसान करा सकता है जब बाजार आपकी दिशा में जा रहा हो, क्योंकि समय (Theta) आपके प्रीमियम को गला देता है। Options trading example

एक्सपायरी डेट (Expiry Date)

यह वह तारीख है जब ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट समाप्त हो जाता है। Options trading example

  • साप्ताहिक (Weekly): भारत में इंडेक्स ऑप्शंस की साप्ताहिक एक्सपायरी गुरुवार को होती है (2026 में SEBI के नए नियमों के तहत अब केवल मुख्य इंडेक्स जैसे निफ्टी की साप्ताहिक एक्सपायरी ही उपलब्ध है)।

  • मासिक (Monthly): महीने के आखिरी गुरुवार को मंथली कॉन्ट्रैक्ट्स खत्म होते हैं।

प्रीमियम (Premium)

प्रीमियम वह कीमत है जो खरीदार, सेलर को अधिकार प्राप्त करने के लिए देता है। इसके दो हिस्से होते हैं:- Options trading example

  • Intrinsic Value: स्ट्राइक और वर्तमान मार्केट प्राइस का वास्तविक अंतर।

  • Time Value: एक्सपायरी तक बचे हुए समय की कीमत।

इन-द-मनी (In-the-Money – ITM)

  • कॉल के लिए: जब मार्केट प्राइस, स्ट्राइक प्राइस से ऊपर हो।

  • पुट के लिए: जब मार्केट प्राइस, स्ट्राइक प्राइस से नीचे हो। इनमें इंट्रिंसिक वैल्यू होती है और इनके प्रॉफिट देने की संभावना अधिक होती है।

ऐट-द-मनी (At-the-Money – ATM)

जब बाजार का भाव (Spot Price) और स्ट्राइक प्राइस लगभग बराबर हों। इनका प्रीमियम मध्यम होता है और इनमें केवल टाइम वैल्यू होती है। Options trading example

आउट-ऑफ-द-मनी (Out-of-the-Money – OTM)

  • कॉल के लिए: बाजार भाव स्ट्राइक से नीचे है।

  • पुट के लिए: बाजार भाव स्ट्राइक से ऊपर है। ये सबसे सस्ते होते हैं, लेकिन एक्सपायरी पर इनके जीरो होने का रिस्क सबसे ज्यादा होता है।

लॉट साइज (Lot Size)

आप एक सिंगल शेयर नहीं खरीद सकते; आपको एक निश्चित ‘लॉट’ में ट्रेड करना होता है। Options trading example

  • उदाहरण: 2026 के अपडेट के अनुसार, निफ्टी का लॉट साइज 25 या 50 (समय-समय पर संशोधित) यूनिट्स का होता है। बैंक निफ्टी के लिए यह और भी कम हो सकता है ताकि रिटेल भागीदारी संतुलित रहे।

मार्जिन (Margin)

ऑप्शन बायर को केवल प्रीमियम देना होता है, लेकिन ऑप्शन सेलर (Writer) को भारी मार्जिन जमा करना पड़ता है। भारत में NSE पर SPAN और Exposure Margin सिस्टम का उपयोग होता है, जो बाजार की अस्थिरता के आधार पर बदलता रहता है। Options trading example

ओपन इंटरेस्ट (Open Interest – OI)

OI हमें बताता है कि बाजार में कितने कॉन्ट्रैक्ट्स अभी भी ‘ओपन’ हैं (सेटल नहीं हुए हैं)। हाई OI का मतलब है कि उस स्ट्राइक प्राइस पर बहुत ज्यादा लिक्विडिटी और ट्रेडर्स की दिलचस्पी है। Options trading example

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वॉल्यूम (Volume)

यह एक दिन के दौरान ट्रेड किए गए कॉन्ट्रैक्ट्स की कुल संख्या है। उच्च वॉल्यूम का मतलब है कि आप आसानी से अपनी पोजीशन से बाहर निकल सकते हैं (कम स्लिपेज)।

ऑप्शन ग्रीक्स (Option Greeks)

ये वो गणितीय कारक हैं जो प्रीमियम की चाल तय करते हैं:

  • Delta: मार्केट ₹1 हिलने पर प्रीमियम कितना हिलेगा।

  • Gamma: डेल्टा के बदलने की रफ़्तार।

  • Theta: समय बीतने के साथ प्रीमियम में होने वाली गिरावट (Time Decay)।

  • Vega: मार्केट की घबराहट (Volatility) का असर।

  • Rho: ब्याज दरों का असर।


Final Guidance for 2026 Target

यदि आप 2026 में ट्रेडिंग शुरू कर रहे हैं, तो आपका Best 2026 Target यह होना चाहिए कि आप पहले 3 महीने केवल Paper Trading करें और इन 11 टर्म्स के आपसी संबंध को समझें। Options trading example

ऑप्शंस कैसे काम करते हैं? चार मुख्य रणनीतियाँ

ऑप्शंस ट्रेडिंग में सफलता पाने के लिए यह समझना जरूरी है कि बाजार की हर चाल (ऊपर, नीचे या स्थिर) के लिए एक विशिष्ट पोजीशन होती है। यदि आप Options trading example for beginners with Best 2026 Target को ध्यान में रखकर ट्रेड कर रहे हैं, तो आपको इन चार पिलर्स को समझना होगा।

कॉल ऑप्शन खरीदना (Long Call)

कॉल ऑप्शन खरीदना एक बिगिनर के लिए सबसे लोकप्रिय कदम होता है। इसे ‘बुलिश’ (Bullish) रणनीति माना जाता है। जब आपको लगता है कि किसी शेयर या इंडेक्स की कीमत एक निश्चित समय के भीतर तेजी से बढ़ने वाली है, तब आप कॉल ऑप्शन खरीदते हैं। Options trading example

कार्यप्रणाली और अधिकार: जब आप एक कॉल ऑप्शन खरीदते हैं, तो आप वास्तव में एक अनुबंध खरीद रहे होते हैं जो आपको भविष्य में एक तय कीमत (स्ट्राइक प्राइस) पर अंडरलाइंग एसेट खरीदने का अधिकार देता है। मान लीजिए निफ्टी 24,000 पर है और आप 24,100 की कॉल खरीदते हैं। आप बाजार को कह रहे हैं, “मैं एक्सपायरी पर इसे 24,100 में खरीदने का हक रखता हूँ, चाहे भाव 25,000 ही क्यों न हो जाए।”

जोखिम और रिवॉर्ड (The Math):

  • सीमित जोखिम (Limited Risk): एक कॉल बायर के रूप में आपका अधिकतम नुकसान केवल उतना ही है जितना आपने ‘प्रीमियम’ चुकाया है। यदि बाजार आपकी दिशा में नहीं जाता, तो आप बस अपना प्रीमियम खोएंगे। 2026 के अस्थिर बाजार में यह सुरक्षा कवच बहुत महत्वपूर्ण है।

  • असीमित लाभ (Unlimited Profit): थ्योरिटिकली, बाजार जितना ऊपर जाएगा, आपका मुनाफा उतना ही बढ़ता जाएगा।

2026 Target के लिए उदाहरण: मान लीजिए आपका Best 2026 Target निफ्टी में 5% की तेजी को भुनाना है।

  • परिदृश्य: निफ्टी ₹24,000 पर है।

  • ट्रेड: आप ₹24,000 की कॉल ₹150 के प्रीमियम पर खरीदते हैं (लॉट साइज 25)। आपका कुल निवेश ₹3,750 है।

  • ब्रेक-ईवन: आपका मुनाफा तब शुरू होगा जब निफ्टी 24,150 (स्ट्राइक + प्रीमियम) के ऊपर जाएगा।

  • मुनाफा: यदि निफ्टी 24,500 पर बंद होता है, तो ऑप्शन की वैल्यू ₹500 होगी। आपका शुद्ध लाभ: (500 – 150) = ₹350 प्रति यूनिट, यानी कुल ₹8,750। यह आपके निवेश पर 133% का रिटर्न है।

सावधानी (The ‘Theta’ Factor): बिगिनर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती ‘टाइम डिके’ (Time Decay) है। यदि बाजार धीरे-धीरे ऊपर जाता है या एक ही जगह खड़ा रहता है, तो आपके कॉल ऑप्शन की वैल्यू कम होती जाएगी। इसलिए, 2026 में सफल होने के लिए केवल दिशा सही होना काफी नहीं है, बल्कि बाजार में ‘मोमेंटम’ (रफ़्तार) का होना भी जरूरी है। एक सफल ट्रेडर बनने के लिए आपको केवल तभी कॉल खरीदना चाहिए जब आपको चार्ट पर स्पष्ट ब्रेकआउट दिखे। Options trading example

कॉल ऑप्शन बेचना (Short Call)

इसे ‘ऑप्शन राइटिंग’ भी कहा जाता है। यह कॉल बायर के ठीक विपरीत है। Options trading example

  • नजरिया: बेयरिश (मंदी) या न्यूट्रल। आपको लगता है कि मार्केट स्ट्राइक प्राइस से ऊपर नहीं जाएगा।

  • प्रॉफिट: बायर द्वारा दिया गया ‘प्रीमियम’ ही आपका अधिकतम मुनाफा है।

  • रिस्क: यदि मार्केट अचानक बहुत ऊपर भाग जाता है, तो आपका नुकसान असीमित हो सकता है।

  • 2026 टिप: सेलिंग के लिए भारी मार्जिन की जरूरत होती है, इसलिए बिगिनर्स को बिना ‘हेजिंग’ के कॉल सेल नहीं करना चाहिए।


पुट ऑप्शन खरीदना (Long Put)

यह रणनीति तब इस्तेमाल होती है जब आपको बाजार में गिरावट की उम्मीद हो।

  • नजरिया: बेयरिश (मंदी)। जैसे इंश्योरेंस काम करता है, पुट ऑप्शन गिरते बाजार में आपको मुनाफा देता है।

  • उदाहरण: यदि निफ्टी 24,000 पर है और आपको लगता है कि बजट या किसी ग्लोबल न्यूज़ के कारण यह 23,500 गिरेगा, तो आप पुट ऑप्शन खरीदते हैं।

  • फायदा: बाजार जितना गिरेगा, पुट का दाम उतना बढ़ेगा। आपका नुकसान सिर्फ चुकाया गया प्रीमियम है।


पुट ऑप्शन बेचना (Short Put)

यह एक बुलिश रणनीति है, लेकिन इसमें आप प्रीमियम ‘खाते’ हैं।  Options trading example

  • नजरिया: बुलिश या साइडवेज। आपको लगता है कि मार्केट एक निश्चित लेवल से नीचे नहीं गिरेगा।

  • इनकम: आप प्रीमियम प्राप्त करते हैं। यदि मार्केट ऊपर जाता है या वहीं खड़ा रहता है, तो समय बीतने के साथ प्रीमियम जीरो हो जाता है और वह आपका मुनाफा बन जाता है।

  • रिस्क: यदि बाजार क्रैश हो जाता है, तो पुट सेलर को बहुत बड़ा नुकसान झेलना पड़ता है।


निष्कर्ष: 2026 के लिए बेस्ट स्ट्रेटजी

एक बिगिनर के लिए Options trading example for beginners with Best 2026 Target यह है कि आप पहले ‘ऑप्शन बाइंग’ (Call/Put Buy) से शुरुआत करें क्योंकि यहाँ आपका रिस्क लिमिटेड है। एक बार जब आप चार्ट पढ़ना और ‘थीटा’ (समय की गिरावट) को समझ लें, तभी ऑप्शन सेलिंग की ओर बढ़ें। Options trading example

इसे और ध्यान से समझने के लिए अगली पोस्ट जरूर पढें